अमरोहा। राष्ट्रीय लोक अदालत में 1.26 लाख वादों में से 1.03 लाख वादों का निस्तारण किया गया। जिला न्यायालय में कुल 6432 वादों का निस्तारण किया गया है। राष्ट्रीय लोक अदालत की शुरुआत प्रशासनिक न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार ने की। कहा कि कोई भी वादकारी राष्ट्रीय लोक अदालत से निराश होकर नहीं जाना चाहिए। सभी को राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ मिलना चाहिए। कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का मकसद लोगों को अधिक से अधिक फायदा पहुंचाना है।
राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1,26,382 वाद लगाए गए। इसमें 1,03,542 विभिन्न प्रकार के वादों का निस्तारण किया गया। जिला न्यायालय में कुल 6432 वादों का निस्तारण किया गया है। इसमें 5647 फौजदारी वादों का निस्तारण करते हुए 6.75 लाख रुपये जुर्माने के रूप में वसूले गए। एनआई एक्ट धारा 138 के सात वादों का निस्तारण किया गया।
विद्युत अधिनियम के 621 वादों का निस्तारण हुआ तो कुटुम्ब न्यायालय की ओर से गठित कमेटी ने पारिवारिक मामलों के 52 वादों का निस्तारण करते हुए 26.95 लाख रुपये प्रतिकर के रूप में दिलाए गए। साथ ही पांच जोड़े साथ-साथ रहने को राजी हुए। न्यायालय में ही पति पत्नी ने एक दूसरे को फूलमाला पहनाई और राजी खुशी विदा किया गया। सिविल के 31 वादों का निस्तारण किया गया एवं उपभोक्ता फोरम में प्री-लिटिगेशन के 16 मामलों का निस्तारण करते हुए 85.20 लाख रुपये प्रतिकर के रूप में दिलाए गए।
बैंकों के ऋण वसूली वाद, दूर संचार के वाद एआरटीओ के चालान, पुलिस के चालान आदि का निस्तारण करते हुए कुल 9.97 करोड़ वसूले गए। सभी तहसीलों व राजस्व न्यायालयों के कुल 1919 वादों का निस्तारण किया गया।