अमेठी सिटी। प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की देखभाल अच्छे से हो। नवजात के बीमार होने पर उसे मां से अलग न किया जाए। उसका अच्छे से ख्याल रखने के लिए मां को प्रशिक्षित किया जाए। इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखकर जिला अस्पताल के साथ सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मदर एंड न्यू बार्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) का संचालन किया जा रहा है। इसके माध्यम से बीते एक वर्ष में समय से पूर्व कम वजन के साथ पैदा हुए 1705 नवजातों का नया जीवन दिया जा चुका है। एमएनसीयू में इन नवजातों को बेहतर इलाज के साथ प्यार दुलार मिला तो वह खिलखिलाने लगे।
एमएनसीयू विशेष रूप से उन बच्चों के लिए जरूरी होता है, जो समय से पहले जन्मे हों या जिनका वजन 2500 ग्राम से कम हो। यहां उन्हें वार्मर, फीडिंग सपोर्ट और मेडिकल स्टॉफ की पूरी निगरानी मिलती है। जिला अस्पताल में 12, अमेठी सीएचसी में तीन और बाकी 11 सीएचसी में दो-दो बेड की व्यवस्था की गई है। यहां जन्म के तुरंत बाद शिशु की निगरानी होती है, जिससे किसी भी बीमारी या जटिलता की जल्दी पहचान और देखभाल संभव होता है।
जिला अस्पताल पर कम हुआ भार
सीएचसी पर उपचार की व्यवस्था न होने पर ऐसे नवजातों को सीधे जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता था। पिछले एक साल से रेफर केस में कमी आई है। जिला अस्पताल में एमएनएसीयू के साथ ही सिक न्यू बार्न केयर यूनिट भी है। बच्चों की स्थिति ज्यादा नाजुक होने पर ही उन्हें यहां भेजा जाता है। एमएनसीयू में मां और शिशु को एक साथ रखा जाता है। शिशु को मां का दूध तुरंत मिल पाता है। मां को बच्चे की बेहतर देखभाल के लिए भी प्रशिक्षित किया जाता है। ताकि नवजात को संक्रमण से बचाया जा सके। कंगारू मदर केयर के तहत मां को शिशु को अपने सीने से चिपकाकर रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे शिशु को तापमान नियंत्रण, श्वसन और स्तनपान में मदद मिलती है। माताओं को नवजात की देखभाल, स्तनपान, टीकाकरण, साफ-सफाई, और पोषण जैसे विषयों पर भी जानकारी दी जाती है।
बिना अतिरिक्त बजट के हो रहा संचालन
एमएनसीयू से बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। अब नवजात बच्चों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों की दौड़ नहीं लगाना पड़ती है। सभी सेंटरों पर जन सहयोग से इन सेंटरों का संचालन किया जा रहा है। इसके लिए शासन से अतिरिक्त बजट तक नहीं मिलता है।
डॉ. अंशुमान सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी