अमेठी के गायत्री शक्तिपीठ में जप करते श्रद्धालु। संवाद
अमेठी। शहर स्थित गायत्री शक्तिपीठ में आयोजित 40 दिवसीय विशेष जप अनुष्ठान के 11वें दिन रविवार को श्रद्धा और साधना का भावपूर्ण संगम देखने को मिला। भोर से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर सामूहिक हवन व मंत्र जाप में सहभागी बने।
गायत्री परिवार की साधिका डॉ. चंद्रावती सिंह ने साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि गायत्री मंत्र केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि मानव जीवन को सद्बुद्धि और श्रेष्ठ चिंतन की ओर ले जाने वाला दिव्य सूत्र है। जब व्यक्ति इसके भावों को आत्मसात करता है, तभी उसके भीतर आत्मिक रूपांतरण संभव होता है। सद्बुद्धि ही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है। उन्होंने परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की रचना अखंड ज्योति का उल्लेख करते हुए साधकों को जीवन में संयम, सेवा और साधना के तीन स्तंभों पर टिके रहने की प्रेरणा दी।
बताया कि यह अभियान आत्मविकास और लोकमंगल की दिशा में समाज को जाग्रत करने की पहल है। श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि लोग अब बाह्य दिखावे की बजाय अंतर्मन की शांति के साधन तलाश रहे हैं। मंत्र जाप व हवन में लाल अशोक सिंह, रुद्र सिंह, वीर सिंह, कोमल मिश्रा, अशोक मिश्र, डॉ. त्रिवेणी सिंह, महेश बरनवाल, शिवप्रसाद तिवारी, संगीता शर्मा, अभिषेक गुप्ता आदि मौजूद रहे।