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मिसरौली रजबहा में सात वर्ष से नहीं आया पानी

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37 : संग्रामपुर : सूखा पड़ा मिसरौली रजबहा। -संवाद - फोटो : AMETHI
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संग्रामपुर (अमेठी)। मिसरौली राजबहा में पिछले सात वर्ष से पानी नहीं आ रहा है। पानी नहीं आने से किसान परेशान हैं। कई किसान तो निजी संसाधन से सिंचाई की व्यवस्था करने पर मजबूर हैं वहीं गरीब किसान यूकेलिप्टस का पेड़ लगाने को मजबूर हैं। समस्या से वाकिफ होने के बावजूद जनप्रतिनिधि इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठा रहे।
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संग्रामपुर ब्लॉक क्षेत्र के मिसरौली सहित दर्जन भर गांव के किसान नहर से फसलों की सिंचाई पर निर्भर हैं। सात वर्ष पहले तक नहर में रबी व खरीफ सीजन में फसलों की सिंचाई के लिए समय से पानी छोड़ा जाता था। पिछले सात वर्षों से कभी-कभी नहर की सफाई का कार्य तो हो जाता है लेकिन किसानों को नहर में पानी देखने को नहीं मिल रहा है।
सात वर्ष से नहर के टेल तक पानी नहीं आया है। पानी नहीं आने से धीरे-धीरे पूरी नहर झाड़-झंखाड़ की चपेट में आ गई है। मौजूदा समय में तो नहर का अस्तित्व ही खतरे में है। सात वर्ष से किसान पानी छोड़े जाने की आस लगाए बैठे हैं। पानी नहीं आने से कुछ किसान मजबूरन स्वयं के संसाधन से सिंचाई की व्यवस्था कर चुके हैं तो गरीब किसानों ने निजी संसाधन की व्यवस्था करने की स्थिति में नहीं होनेे के चलते अपने खेतों में यूकेलिप्टस के पेड़ लगाना शुरू कर दिया है।
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इन गांवों के किसान परेशान
नहर से मड़ौली, खौसी का पुरवा, मानिकापुर, भुलाई का पुरवा, करौंदी, मिश्रौली, तारापुर, खुशियाल तिवारी का पुरवा, सरैया आदि गांवों में पानी पहुंचता था। पिछले सात वर्ष से नहर का पानी हथकिला चौराहे के आगे नहीं पहुंचा है।
किसान मजबूरन लगा रहे पेड़
मिश्रौली गांव के शिव प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि नहर का अस्तित्व अब खत्म हो रहा है। मजबूरन किसान यूकेलिप्टस के पेड़ खेतों में लगाने को मजबूर हो रहे हैं। सिंचाई की व्यवस्था के लिए नहर की साफ सफाई कर जलापूर्ति की जाए तो अच्छा रहेगा। किसानों की सुनने वाला कोई नहीं है। डीजल के दाम इतने बढ़ गए हैं कि इंजन से सिंचाई करना सबके बस की नहीं है।
फरियाद सुनने वाला कोई नहीं
मिश्रौली माफी निवासी लक्ष्मण पांडेय ने कहा एक बार जब सात वर्ष पहले गायत्री प्रजापति मंत्री बने थे। तब नहर में पानी आया था। उसके बाद पानी देखने को नहीं मिला। विधायक प्रतिनिधि को समस्या से अवगत कराया गया था लेकिन हम किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है। पिछले सात वर्ष से पानी छोड़े जाने के लिए हम लोग आस लगाये बैठे हैं। पानी नहीं आने के कारण रबी फसल की बोआई नहीं कर पाएंगे।
सफाई के नाम पर खारिज हो रहा पैसा
करौंदी गांव निवासी हरिश्चंद्र के अनुसार नहर की सिल्ट सफाई के नाम पर पैसा खर्च हो गया है। पानी भी कागज में दौड़ लगा रहा है। लेकिन हम लोगों को पानी देखने को नहीं मिलता। कभी कभार हथकिला चौराहे तक पानी पहुंच जाता है। लेकिन उसके आगे नहीं बढ़ पाता है।
अनजान बने जनप्रतिनिधि
मिसरौली गांव निवासी गार्ड पांडेय ने कहा कि सिंचाई की सबसे उत्तम व्यवस्था नहर होती है। पानी नहीं आने से किसान सिंचाई के लिए स्वयं की व्यवस्था करने को मजबूर हैं। हर किसान सिंचाई का निजी संसाधन नहीं बना सकता। जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत भी कराया गया है। बावजूद इसके वह अनजान बने हुए हैं।
जल्द होगी जलापूर्ति
एसडीएम संजीव कुमार मौर्य ने कहा कि समस्या संज्ञान में आई है। जल्द ही जलापूर्ति कराई जाएगी। नहर की सिल्ट सफाई अभियान के साथ ही जलापूर्ति के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है। जल्द ही नहर में जलापूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी।
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