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नियुक्ति में भ्रष्टाचार में फंसे वंशीधर

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अमेठी। शासन द्वारा बर्खास्त अमेठी के डीडीओ पर आरोपों की फेहरिस्त बहुत लंबी थी। मिर्जापुर जनपद में नियम विरुद्ध ग्राम विकास अधिकारियों तथा उर्दू अनुवादकों की नियुक्ति पर शासन एक बार पहले भी इन्हें बर्खास्त कर चुका था। उच्च न्यायालय के निर्देश पर कराई गई जांच में दोष सिद्ध होने पर सोमवार को शासन ने इन्हें दोबारा बर्खास्त कर दिया। डीडीओ की बर्खास्तगी से जिले में हड़कंप मचा है।
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जिला विकास अधिकारी वंशीधर सरोज नौकरी के शुरूआती दौर से ही आरोपों के घेरे में रहे हैं। डीडीओ पर बड़ा आरोप मिर्जापुर में तैनाती के दौरान लगा। वर्ष 2012 में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रिक्त पदों को भरने का शासनादेश जारी हुआ। शासनादेश में मिर्जापुर के कुल 172 पद शामिल थे।
इसमें ग्राम विकास अधिकारी के 36 पद थे। डीडीओ वंशीधर सरोज की ओर से 36 पदों के सापेक्ष 40 पदों का विज्ञापन प्रकाशित कराया गया और 50 पदों पर चयन कर लिया गया। इसके बाद शासन स्तर से इस अनियमितता की निर्धारित आठ बिंदुओं पर जांच शुरू हुई। जांच में दोषी पाए जाने पर जांच अधिकारी ने पांच जनवरी 2016 को वंशीधर सरोज को बर्खास्त करने की सहमति प्रदान करते हुए रिपोर्ट शासन को सौंपी थी।
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जांच अधिकारी की रिपोर्ट मिलने के बाद शासन ने 28 मार्च 2016 को वंशीधर सरोज को बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद वंशीधर उच्च न्यायालय गए, जहां से इन्हें राहत देते हुए सरकार को दोबारा जांच कराने का निर्देश दिया गया। शासन की ओर से प्रकरण की पुन: जांच के लिए जांच अधिकारी नामित किए गए।
जांच अधिकारी ने पुन: जांच में कुल आठ आरोप व चार अनुपूरक आरोपों में से पांच आरोप पूर्ण तो एक आरोप आंशिक रूप से सिद्ध पाया। जांच पूरी होने के बाद चार अप्रैल को जांच प्रक्रिया बंद करते हुए लिफाफा लोक सेवा आयोग को भेजा गया था। इसके बाद सरकार ने सोमवार को वंशीधर सरोज को दोबारा बर्खास्त कर दिया।
अमेठी में तैनाती के दौरान भी डीडीओ पर कई आरोप लगे। सीडीओ के स्थानांतरण के दौरान कई बार वंशीधर के पास अमेठी के सीडीओ का भी प्रभार रहा है। इस दौरान उन पर कर्मचारियों को प्रताड़ित करने तथा भ्रष्टाचार के भी गंभीर आरोप लगे। एक कर्मचारी की पत्नी ने तो अभी हाल में ही इनके खिलाफ शासन स्तर तक पत्राचार किया था।
सीडीओ का प्रभार रहते वंशीधर सरोज ने डीपीआरओ कार्यालय तथा ब्लॉक मुख्यालयों पर अपने करीबी तथा रिश्तेदारों को कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर चयनित कराया। हालांकि सीडीओ का प्रभार रहने तथा तत्कालीन उच्चाधिकारियों से अच्छे संबंध रहने के चलते कोई खुलकर शिकायत नहीं कर सका।
सूत्रों की बातों पर यकीन करें तो वंशीधर सरोज खंड विकास अधिकारी रहने के समय से ही बात-बात पर कोर्ट की शरण लेने के अभ्यस्त थे। इनका जब भी स्थानांतरण होता था यह न्यायालय में रिट कर स्थानांतरण रुकवा लेते थे। अमेठी में तत्कालीन सीडीओ मनोज कुमार के डीओ पर शासन ने वंशीधर सरोज को मुख्यालय से संबद्ध करने का आदेश जारी किया था। तब भी वंशीधर हाईकोर्ट से राहत पाकर अब तक अमेठी में ही डटे रहे।
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