अमेठी तहसील में अधिवक्ता सदाशिव पाण्डेय को समझाते पुलिस कर्मी। संगठन
अमेठी। बार एसोसिएशन अमेठी के चुनाव में रिकाउंटिंग विवाद के बीच बृहस्पतिवार को शपथ ग्रहण समारोह में हंगामा हो गया। अमेठी तहसील सभागार में नवनिर्वाचित पदाधिकारियों की शपथ ग्रहण के दौरान अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सदाशिव पांडेय ने आपत्ति जताते हुए विरोध शुरू कर दिया। अधिवक्ताओं के बीच नोकझोंक बढ़ने पर माहौल तनावपूर्ण बन गया। प्रभारी निरीक्षक रवि सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे, जिसके बाद माहौल शांत हुआ।
अध्यक्ष पद पर दिनेश प्रताप सिंह ने 73 मत प्राप्त कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सदाशिव पांडेय को दो मतों से पराजित किया था। परिणाम आने के बाद से ही रिकाउंटिंग को लेकर विवाद चल रहा था। बृहस्पतिवार को शपथ ग्रहण समारोह में इसी मुद्दे को लेकर विवाद शुरू हो गया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद समारोह की प्रक्रिया पूरी कराई गई। सीनियर उपाध्यक्ष पद पर कैलाशनाथ शुक्ल ने 92 मतों से विजय प्राप्त की, जबकि सतीश कुमार मौर्य को 79 मत मिले।
कैलाशनाथ शुक्ल जनपद से बाहर होने के कारण शपथ नहीं ले सके। सचिव पद पर अनिल कुमार तिवारी ने 53 मतों से जीत हासिल की, जबकि अमित शंकर शुक्ल को 50 मत मिले। कोषाध्यक्ष पद पर सियाराम यादव ने 71 मत पाकर प्रेमनारायण दुबे (65 मत) को हराया। चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और पारदर्शी बताई गई। मतदान व मतगणना की जिम्मेदारी एल्डर्स कमेटी ने निभाई। शपथ ग्रहण भी उनके नेतृत्व में हुआ। कार्यक्रम के दौरान कुछ अधिवक्ता परिणामों पर असंतोष जताते रहे, मगर वरिष्ठ सदस्यों ने बीचबचाव कर स्थिति संभाल ली। नवनिर्वाचित अध्यक्ष दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि अधिवक्ताओं का विश्वास उनके लिए प्रेरणा का कार्य करेगा। संगठन को एकजुट रखकर सभी सदस्यों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से कराया जाएगा।
प्रत्याशी ने जताई आपत्ति
शपथ ग्रहण समारोह के बीच रिकाउंटिंग की मांग कर रहे प्रत्याशी सदाशिव पांडेय अपने समर्थक अधिवक्ताओं के साथ सभागार पहुंच गए और आपत्ति जताई। उन्होंने कहा जब एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन ने त्यागपत्र दे दिया तो उनकी कमेटी खुद ही भंग हो गई। उन्होंने लिखित रूप में प्रत्याशियों को संतुष्ट करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बिना किसी समाधान के अवैधानिक तरीके से शपथ ग्रहण समारोह आयोजित कर लिया गया। हम इसे मान्यता नहीं देते। सदाशिव पांडेय ने आरोप लगाया कि रिकाउंटिंग की मांग अनसुनी कर दी गई, जिससे अधिवक्ताओं में असंतोष है। उन्होंने कहा कि एल्डर्स कमेटी को निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए था। जब एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन मौजूद ही नहीं हैं तो शपथ ग्रहण समारोह किस आधार पर आयोजित किया गया।