प्रतिष्ठान पर सिलाई करती उमा। स्रोत: स्व
अमेठी। बहादुरपुर के सरवन गांव की उमा साहू ने सीमित संसाधनों के बीच अपने जीवन की दिशा बदली और आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल पेश की। कभी आर्थिक तंगी से जूझता उनका परिवार आज स्थिर आय के सहारे आगे बढ़ रहा है। उमा ने अपने हुनर के जरिये न केवल अपनी स्थिति सुधारी, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी राह दिखाई।
पहले परिवार की आय पूरी तरह खेती पर आधारित रही। महीने में करीब छह हजार रुपये मिलते थे, जिनसे बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घर की जरूरतें पूरी करना कठिन रहता था। अक्सर उधार का सहारा लेना पड़ता था, जिससे चिंता बनी रहती थी। इसी दौर में उमा ने अपने भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानने का फैसला किया।
उन्होंने सिलाई और ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण लिया और पूरी लगन से काम सीखा। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, मगर काम की गुणवत्ता और निरंतरता ने धीरे-धीरे उन्हें पहचान दिलाई।
उनके प्रयासों से ग्राहकों का भरोसा बढ़ा और काम का दायरा विस्तृत होता गया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 15 महिलाओं के साथ समूह का गठन हुआ। समूह से जुड़ाव ने उमा को नई दिशा दी। प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग ने उनके काम को गति दी।
आज उनकी मासिक आय करीब 18 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। आय में वृद्धि के साथ बच्चों की पढ़ाई बेहतर ढंग से हो रही है और घर की आवश्यकताएं सहज रूप से पूरी हो रही हैं।
उमा ने अपने अनुभव को सीमित नहीं रखा। अब तक 50 से अधिक महिलाओं को सिलाई और ब्यूटी का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनके मार्गदर्शन में कई महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर परिवार की आय बढ़ा रही हैं।