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सड़क हादसे में दो सगे भाइयों की मौत, दो घायल

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संग्रामपुर (अमेठी)। गौरीगंज-प्रतापगढ़ मार्ग पर बुधवार देर रात आमने-सामने दो बाइकों की टक्कर में चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। एंबुलेंस की मदद से घायलों को सीएचसी अमेठी पहुंचाया गया जहां चिकित्सकों ने दो को मृत घोषित कर दिया। एक की हालत गंभीर देख उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया तो एक घायल का इलाज प्रतापगढ़ में चल रहा है।
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संग्रामपुर थाना क्षेत्र के मिसिरपुर मजरे सोनारी कनू निवासी दो सगे भाई सुनील कुमार विश्वकर्मा (25) और गुड्डू विश्वकर्मा (18) बुधवार को रामगंज थाना क्षेत्र के परसोईया गांव में अपनी बहन के यहां निमंत्रण में गए थे। देर रात दोनों निमंत्रण से घर लौट रहे थे। वे अभी संग्रामपुर थाना क्षेत्र के मालती नदी पर बने रामघाट पुल पर पहुंचे ही थे कि उनकी बाइक सामने से आ रही दूसी बाइक से टकरा गई। दुर्घटना में दोनों बाइक पर सवार चारों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।
दूसरी बाइक पर प्रतापगढ़ के थाना अंतू के गांव छतरपुर निवासी सुनील कुमार व उसका एक साथी बैठा था। इस बीच वहां से गुजर रहे कुछ राहगीर रुके और एंबुलेंस को सूचना दी। इस बीच छतरपुर के सुनील के साथ बैठे युवक के परिवारीजन आ गए और उसे लेकर प्रतापगढ़ चले गए जबकि अन्य तीन घायलों को एंबुलेंस कर्मियों ने सीएचसी अमेठी पहुंचाया।
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अस्पताल में चिकित्सकों ने मिसिरपुर निवासी सुनील विश्वकर्मा को मृत घोषित कर दिया जबकि गुड्डू तथा छतरपुर निवासी सुनील कुमार को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल ले जाते समय गुड्डू की भी मौत हो गई जबकि घायल सुनील को चिकित्सकों ने ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
सड़क दुर्घटना में मृत सुनील और गुड्डू सगे भाई थे। दोनों भाई अपने पिता रामचंद्र के साथ मजदूरी करते थे जबकि बड़ा भाई अशोक गुजरात में नौकरी करता है। दोनों भाइयों की अभी शादी नहीं हुई थी। उनकी तीन बहनें अंजू, मंजू व संजू शादीशुदा हैं। दो भाइयों की मौत की सूचना मिलते ही जहां परिवार में कोहराम मच गया वहीं पूरे गांव में मातम पसरा है। गुरुवार सुबह से ही मृतक के घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा।
मृतक दोनों भाई सुनील और गुड्डू अपनी बहन अंजू के यहां परसोइया में निमंत्रण के लिए गए थे। जब निमंत्रण में देर हो गई तो बहन अंजू ने कहा था कि भैया आज मत जाओ रात काफी हो गई है सुबह जाना। लेकिन दोनों भाइयों ने बहन से घर पर अम्मा-बाबू के अकेले होने के चलते घर जाना जरूरी बताते हुए निकल पड़े थे। मौत के बाद घर पहुंची बहन यही कहकर रोते-रोते बेहोश हो जा रही थी।
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