अमेठी। अवधी साहित्य संस्थान के स्थापना दिवस पर बृहस्पतिवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन मंगलपुर स्थित निजी कॉलेज के सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार के पूर्व गृह सचिव जियालाल आर्य ने की।
कवि सम्मेलन की शुरुआत मां सरस्वती की वाणी वंदना से हुई। कवि बघेली ने पढ़ा कि बैठ न्याय के देवी आंखी पट्टी बांधे, हियां जिंदगी पूर जिंदगी सबका नाच नचावै। प्रतिभा पांडेय ने पढ़ा कि बहुत बड़े मत बनना, छोटेपन का मजा अनूठा है। डॉ. प्रिया ठाकुर ने सुनाया कि मां के जितना इस दुनिया में मुझे कोई चाह नहीं सकता। हरिनाथ शुक्ल ने हरि नेकहि पूरनिये गयेन ई कहानी सखी, अवधी आ लोक भषवन कै रानी सखी पढ़कर तालियां बटोरीं। रश्मि शुक्ला शील ने सुनाया कि मात पिता इस दुनिया में ईश्वर सम होते हैं। अनुपम पांडेय ने ये जो बरकत है तुम्हारे कदम चूमेगी, दरो दीवार पर मां-बाप की निशानी रखना... से लोगों को सीख दी।
ज्ञानेंद्र पांडेय, आशिक रायबरेली, प्रयास जोशी, शिवाकांत त्रिपाठी, अरुण तिवारी, अनीस देहाती, सुजाता नुना, आरती दुबे, पुरुषोत्तम तिवारी, अमर बहादुर सिंह, राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, पप्पू सिंह, एसपी मिश्रा, कुंज बिहारी लाल मौर्य, श्रीनाथ मौर्य, इंद्रजीत सिंह, राम लखन तिवारी, नरेंद्र प्रताप शुक्ल, रामरथ पांडेय, अनिरुद्ध मिश्रा, जानकी गुप्ता, पुष्पेंद्र पांडेय, जगदंबा तिवारी, शब्बीर अहमद सूरी, रामेश्वर सिंह निराश, रामबदन शुक्ल पथिक आदि कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में प्रो. हेमराज मीणा, राजेश विक्रांत, डॉ. शिवम तिवारी, डॉ. अभिमन्यु, हौसला प्रसाद तिवारी, सुनील वाजपेयी आदि मौजूद रहे।
हिंदी संपूर्ण देश की प्यारी भाषा
आंध्र प्रदेश की प्रो. विजया भारती जेल्दी ने कहा कि हिंदी संपूर्ण भारत की प्यारी भाषा है। अवधी साहित्य संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पांडेय ने कवि और साहित्यकारों का स्वागत करते हुए कहा कि कला और संगीत हिंदी साहित्य के बिना संभव नहीं है। प्रबंधक डाॅ. देवमणि पांडेय ने कहा कि अवधी साहित्य संस्थान लगातार साहित्य संस्कृति और भाषा के संवर्धन के लिए कार्य कर रहा है। अध्यक्षता कर रहे जियालाल आर्य ने कहा कि निज भाषा, निज संस्कृति और अपने देश पर सबको गर्व होना चाहिए।