मुसाफिरखाना (अमेठी)। तेंदुए के हमले के बाद बिरईपुर और आसपास के गांवों में दहशत रही। शनिवार दोपहर से शुरू हुआ डर रविवार सुबह तेंदुए का शव मिलने तक कायम रहा। इस दौरान गांव की गलियां वीरान रहीं। लोग घरों में कैद रहे और पुरुषों ने लाठी-टॉर्च लेकर पूरी रात पहरेदारी की।
तेंदुआ शनिवार दोपहर बिरईपुर गांव की सीमा पर देखा गया। कुछ ही देर में उसने दो लोगों पर हमला कर दिया और फिर एक भैंस पर झपट पड़ा। वन विभाग की टीम जैसे ही पहुंची, तेंदुआ उनकी कार पर चढ़कर बोनट तोड़ गया। इसके बाद से ही ग्रामीण सतर्क हो गए। गांव के पुरुषों ने मोर्चा संभालते हुए स्कूल, मंदिर और गली-मोहल्लों के पास समूह में निगरानी शुरू कर दी। रात में कोई भी चैन से नहीं सोया। हर घर में बच्चे और महिलाएं सहमे हुए थे।
दरवाजे बंद कर दिए गए थे। कोई हलचल होते ही पुरुषों की टोली दौड़ पड़ती थी। टोर्च और डंडा लिए ये लोग खेतों और पगडंडियों पर चक्कर लगाते रहे। गांव के रामदीन यादव ने बताया कि हम पांच लोग स्कूल के पास डंडा लेकर निगरानी कर रहे थे। कोई आवाज आती तो उधर दौड़ जाते। रातभर ऐसा ही चला। गांव की महिलाओं ने भी घर के भीतर से आवाजें सुनकर खिड़कियों से झांककर स्थिति समझने की कोशिश की। (संवाद)