अमेठी सिटी। सावन में फुहारों की उम्मीद लगाए बैठे लोग धूप और उमस की मार से परेशान हैं। बारिश नहीं होने और अधिकांश नहरों में पानी न छोड़े जाने से धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। नतीजा ये कि फसल भी सूख रही है। आसमान की तरफ निहार रहे किसान मजबूरी में निजी संसाधनों से खेत सींच रहे हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ अलग से बढ़ रहा है।
तिलोई, गौरीगंज, भादर और मुसाफिरखाना क्षेत्र में अधिकांश नहरें सूखी हैं। रोजाना छह से आठ घंटे बिजली कटौती ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। डीजल के महंगे दाम और मजदूरी की लागत ने खेती करना भारी पड़ रहा है। किसान निजी या किराये के नलकूपों से सिंचाई करा रहे हैं, जिससे एक बीघे में ही सैकड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं।
इधर, तेज धूप के चलते बाजारों में भी गर्मी के चलते चहल-पहल कम हो गई है। इससे व्यापार पर भी खासा असर पड़ रहा है। सुबह से लेकर दोपहर तक दुकानदार सन्नाटे में बैठे रहते हैं। शहर से लेकर गांव तक बिजली संकट ने आम लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त कर दी है। स्कूली बच्चे भरी दोपहरी में जब घर लौटते हैं तो थकान से बेहाल हो जाते हैं।
खेत सूखे, किसान चिंतित
भादर के किसान राम केवल ने बताया कि एक बीघा खेत में सिंचाई के लिए 800 से 1000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। नहरों में पानी नहीं है। बिजली की आंख मिचौली के चलते डीजल इंजन का ही सहारा लेना पड़ रहा है। समय से रोपाई नहीं हुई तो पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा।
बिजली कटौती बनी नई मुसीबत
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली बार-बार कट रही है। किसान धर्मराज सिंह का कहना है कि जिनके पास डीजल इंजन नहीं है, उनके खेतों में रोपाई रुक गई है। शहर से लेकर गांव तक उपभोक्ता बिजली की ट्रिपिंग और लंबे कटौती के कारण परेशान हैं।