जामों के लालपुर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में मौजूद श्रद्धालु। स्रोत-आयोजक।
जामों (अमेठी)। भगवान की भक्ति में ही असली शक्ति निहित है। हमें अपने बच्चों को शिक्षित ही नहीं संस्कारयुक्त बनाने की जरूरत है। संस्कारित बच्चे भविष्य में समाज में नाम रोशन करने के साथ हमेशा उन्नति की तरफ अग्रसर रहते हैं।
ये बातें क्षेत्र के लालपुर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को प्रवाचक आचार्य शान्तनु ने कहीं। उन्होंने बताया कि मनुष्य को हमेशा गृह कार्य से छुट्टी पाने पर सत्संग करना चाहिए, जिससे मानव की दशा एवं दिशा में परिवर्तन आ जाता है। सत्संग ऐसा उपाय है कि बड़े से बड़े पापी के मन में भगवान के प्रति विश्वास हो जाता है।
उन्होने बताया कि हरि कीर्तन और भजन में मन लगाने से मनुष्य निश्चित रूप से जीवन और मृत्यु से मुक्त हो जाता है। ईश्वर की भक्ति ही मनुष्य के लिए बहुत बड़ी शक्ति होती है। मनुष्य को हमेशा सत्कर्म करना चाहिए, जिससे मनुष्य का जीवन सुखमय होकर विकास की ओर अग्रसर रहने के साथ इस योनि में सफलती मिल जाएगी। मृत्यु लोक में जीवन-मरण का चक्र हमेशा चलता रहेगा। इससे मनुष्य को कभी परेशान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि दुनिया भर में श्रीमद्भागवत कथा महापुराण सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ माना गया है। इसमें बताया गया है कि धर्म ही सत्य है, मनुष्य को हमेशा भगवान को याद करते हुए अपना कर्म करना चाहिए। पाप करने वाला व्यक्ति सच्चे मन से ईश्वर को याद करते हुए प्रायश्चित कर लेता है तो उसका किया गया पाप भी खत्म हो जाता है। इस अवसर पर मुख्य यजमान उमानाथ सिंह, विजय विक्रम सिंह, यादुवेंद्र श्रीवास्तव, कुलदीप सिंह, विपिन यादव आदि मौजूद रहे।