मुसाफिरखाना (अमेठी)। कादूनाला वन क्षेत्र से सटे बिरईपुर और आसपास के गांवों में 16 घंटे तक दहशत फैलाने वाले तेंदुए की मौत चोट लगने से नहीं, बल्कि सेप्टिसीमिया से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। वन विभाग ने विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए आईवीआरआई (इंडियन वेटेरिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट) बरेली भेज दिया है। तेंदुआ की मौत के बाद भी बिरईपुर के ग्रामीण दहशत में हैं और अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घर से बाहर कदम रख रहे हैं।
डीएफओ रणवीर मिश्र ने बताया कि रिपोर्ट में तेंदुआ की मौत का कारण सेप्टिसीमिया बताया गया है। इसमें सांस लेने में कठिनाई, कम रक्तचाप और मानसिक स्थिति में बदलाव जैसे लक्षण मिले हैं, जो रक्त में बैक्टीरिया के प्रसार से होते हैं। तेंदुआ की उम्र करीब 16 साल थी और वह पहले से घायल व कमजोर था। बरेली से रिपोर्ट आने के बाद और तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे।
भैंसों ने नहीं पहुंचाई चोट
रविवार को वन विभाग के अफसरों ने ये आशंका जताई थी कि भैंसाें के हमले में घायल होने पर तेंदुआ की जान गई होगी। सोमवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह पता चली। अब ये बताया जा रहा है कि तेंदुआ पहले से घायल था। उसके सिर पर चोट लगी थी। समय से इलाज न होने के कारण घाव में कीड़े पड़ गए थे। सेप्टिसीमिया होने पर उसकी मौत हो गई।
अब भी है ग्रामीणों में डर
शनिवार सुबह करीब 10 बजे तेंदुए ने बिरईपुर निवासी विजय उर्फ सोनू और भैदपुर निवासी बलदेव पर झाड़ियों से निकलकर हमला कर दिया था। दोपहर में उसने वन दरोगा शुभम भटनागर की कार का बोनट तोड़ दिया था। कुछ देर बाद उसने रामकिशोर की भैंस और किसान छोटेलाल को घायल कर दिया था। शनिवार देर रात उसका शव बिरईपुर निवासी झिंगुरी की पशुशाला के पास मिला था। तेंदुए की मौत के बाद भी बिरईपुर और आसपास के गांवों में डर बना हुआ है। पहली बार तेंदुआ के दिखने और हमले की घटना के बाद से लोग घर से लाठी-डंडा लेकर निकल रहे हैं।
बाराबंकी से भटककर आया होगा तेंदुआ
वन विभाग का अनुमान है कि यह तेंदुआ बहराइच के जंगलों से रास्ता भटककर बाराबंकी होते हुए गोमती नदी की कछार से अमेठी पहुंचा। विभाग अब पूरे क्षेत्र में तेंदुओं की मौजूदगी के पुराने रिकाॅर्ड खंगाल रहा है।