मुंशीगंज। भगवान भोलेनाथ ने माता पार्वती को अमर कथा अमरनाथ गुफा में सुनाई थी, जिसमें सृष्टि के रहस्य और अमरत्व का ज्ञान था। कथा सुनते-सुनते पार्वतीजी को नींद आ गई, लेकिन वहां मौजूद कबूतरों के जोड़े ने कथा सुन ली और अमर हो गए, जिससे वे आज भी अमरनाथ में अमर पक्षी के रूप में देखे जाते हैं। वे सुख-सौभाग्य के प्रतीक हैं। यह कथा भागवत कथा के समान ही मानी जाती है, जो जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाती है।
ये बातें भेंटुआ के सरुवावां अंगून का पुरवा गांव स्थित हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान प्रवाचक वृंदावन धाम से पधारी चारू कृष्णा प्रिया ने कहीं। कहा कि कथा समाप्त होने पर महादेव की दृष्टि कबूतरों पर पड़ी तो वे क्रोधित हो गए। कबूतरों ने भगवान शिव से कहा कि प्रभु हमें मार देंगे तो अमर होने की यह कथा झूठी हो जाएगी।
इस पर शिवजी ने कबूतरों को जीवित छोड़ दिया और उन्हें आशीर्वाद दिया कि तुम सदैव इस स्थान पर शिव-पार्वती के प्रतीक चिह्न के रूप में निवास करोगे। इस दौरान हौसिला प्रसाद यादव, राजकरन यादव, रंग बहादुर यादव, शीतला प्रसाद गुप्ता, कैलाश दूबे, दया शंकर, जगन्नाथ मिश्र, मनोज सिंह, रवि प्रकाश सिंह, धर्मेंद्र, रंजीत यादव, संदीप यादव आदि उपस्थित रहे।