अमेठी। गर्मी में अग्निकांड बढ़ जाते हैं। ऐसे में सबसे पहले अग्निशमन विभाग को याद किया जाता है, लेकिन जिले में इस विभाग की दशा बेहद खराब है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी, अग्निशमन अधिकारी यहां हैं ही नहीं और फायरमैन के 58 पद रिक्त हैं। मैन पावर के साथ संसाधनों की भी भारी कमी है। अग्निकांड से बचाव के लिए लोगों को जागरूक तो किया जा रहा है, लेकिन विभाग में मैन पावर और संसाधनों की उपलब्धता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
अमेठी, गौरीगंज, मुसाफिरखाना, जगदीशपुर, जायस, मोहनगंज और बाजारशुकुल में सात फायर स्टेशन संचालित हैं, लेकिन व्यवस्थाएं तय मानकों के अनुरूप नहीं हैं। विभाग में 194 पद स्वीकृत हैं, जबकि 109 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। चालक के 17 पद स्वीकृत हैं, जिनमें केवल आठ तैनात हैं। लीडिंग फायरमैन के 17 पदों में भी आठ कर्मी ही कार्य कर रहे हैं। फायरमैन के 125 पदों के मुकाबले 67 कर्मचारी उपलब्ध हैं। अग्निशमन द्वितीय अधिकारी के नौ पदों में केवल दो अधिकारी हैं।
फायर टेंडर भी सीमित, बुलेट सिर्फ अमेठी में
वाहनों और उपकरणों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। जिले में 5000 लीटर क्षमता की केवल तीन दमकल गाड़ियां उपलब्ध हैं, जो मुसाफिरखाना, अमेठी और जगदीशपुर में हैं। 2500 लीटर क्षमता वाले मिनी वाटर टेंडर सीमित संख्या में हैं। 400 लीटर क्षमता वाले हाई प्रेशर वाहन भी केवल चार स्थानों पर उपलब्ध हैं, जबकि छोटे हादसों में उपयोगी 40 लीटर क्षमता वाले बुलेट वाहन केवल अमेठी स्टेशन तक सीमित हैं। स्थिति यह है कि आवश्यकता पड़ने पर विभाग को निजी कंपनियों से वाहन लेना पड़ता है।
आपसी समन्वय से हो रहा काम
प्रभारी अग्निशमन अधिकारी ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि सीमित संसाधनों और कर्मचारियों के बावजूद विभाग पूरी तत्परता से काम कर रहा है। आपसी समन्वय के जरिये व्यवस्था संभाली जाती है। आवश्यकता पड़ने पर नजदीकी फायर स्टेशनों और निजी इकाइयों से भी मदद ली जाती है, ताकि किसी भी घटना में राहत कार्य प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग उच्चाधिकारियों को संसाधनों की कमी से अवगत करा चुका है और जल्द ही स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
पांच वर्षों में हुए अग्निकांड
वर्ष- घटनाएं- जीव रक्षा
2020- 280 - 82
2021- 475 - 82
2022- 515- 100
2023- 138 -139
2024- 840-120
2025- 778- 120