अमेठी सीएचसी में भर्ती किसान का इलाज करते स्वास्थ्य कर्मी। स्त्रोत : स्थानीय नागरिक
अमेठी। गंगौली गांव में चकबंदी विभाग में कथित भ्रष्टाचार के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन नौवें दिन मंगलवार को भी जारी रहा। प्रशासनिक उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरने को आमरण अनशन में बदल दिया। इसी दौरान अनशन पर बैठे किसान प्रेमशंकर द्विवेदी की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी हालत स्थिर बताई है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चकबंदी विभाग ने पूर्व प्रधान के परिवार को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की। करोड़ों की जमीन तालाब खाते से घटाकर प्रधान के नाम दर्ज कर दी गई। लोगों का कहना है कि कई मुकदमों में अधिकारियों ने पक्षपातपूर्ण फैसले दिए और भ्रष्टाचार की शिकायतों को दबा दिया। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राजकुमार पांडेय ने कहा कि गंगौली में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और प्रशासन जानबूझकर मौन है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीणों का संघर्ष न्याय न मिलने तक जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पूर्व प्रधान ने बैंक मैनेजर, कैशियर और रिश्तेदारों के नाम पर अवैध पट्टे करवाए, जबकि कई लाभार्थी दूसरे गांवों के हैं। उच्च न्यायालय और एडीएम के आदेशों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से भूमि का बंटवारा किया गया। धरने में विनोद यादव, दद्दन यादव, अजय सिंह, राहुल मिश्रा, विजय शंकर द्विवेदी, नीरज मिश्रा, ज्ञानेंद्र सिंह, इंद्रजीत यादव, पंकज यादव आदि मौजूद रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।