अमेठी सिटी। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के क्रियान्वयन में अनियमितताओं के आरोप से जिला समाज कल्याण विभाग सवालों के घेरे में आ गया है। नामित विवादित फर्म ने प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी व परियोजना निदेशक ऐश्वर्य यादव पर कमीशन मांगने का गंभीर आरोप लगाया। डीएम व सीडीओ की ओर से गठित जांच टीम ने लगाए गए आरोपों पर अपना पक्ष रखने के लिए फर्म संचालक को एक अंतिम मौका दिया है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम के लाभार्थी असमंजस में हैं। दो बार विवाह कार्यक्रम की प्रस्तावित तिथि स्थगित होने के बाद से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता के बाद समाज कल्याण विभाग के अफसरों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले को शासन की ओर से 308 जोड़ों का विवाह कराने का लक्ष्य मिला है। सामूहिक विवाह कार्यक्रम के आयोजन और विवाह उपरांत वधुओं को दी जाने वाली उपहार सामग्री की आपूर्ति के लिए जेम पोर्टल के माध्यम से मेसर्स श्री बालाजी फूड प्रोडक्ट्स बड़ा घोसियाना मलिकमऊ रोड, रायबरेली को एल-वन फर्म घोषित करते हुए चयनित किया गया था।
चयनित फर्म का फर्जी अभिलेख लगाकर टेंडर लेने का मामला प्रकाश में आने से फर्म के खिलाफ कार्रवाई चल रही है। फर्म के संचालक जगदीश प्रसाद ने प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी व परियोजना निदेशक ऐश्वर्य यादव पर कमीशन मांगने का आरोप लगाया। जिलाधिकारी संजय चौहान व मुख्य विकास अधिकारी सचिन कुमार सिंह ने जांच के लिए जिला विकास अधिकारी और जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी की टीम गठित की है। शुक्रवार को टीम ने फर्म संचालक को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था, लेकिन फर्म संचालक नहीं आए। इसके बाद टीम विवादित फर्म के संचालक को पक्ष रखने के लिए एक और मौका देगी। इसके बाद टीम अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को देगी।
जिला विकास अधिकारी वीरभानु ने बताया कि परियोजना निदेशक पर कमीशन मांगने के संबंध में फर्म संचालक को अपना पक्ष रखने के लिए शुक्रवार को कार्यालय बुलाया गया था, लेकिन फर्म संचालक नहीं आए। बताया कि 15 जनवरी के बाद फर्म संचालक को पक्ष रखने का अंतिम मौका दिया जाएगा। इसके बाद रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।