अमेठी सिटी। अवधी संस्थान की ओर से रविवार को अमेठी ब्लॉक के शुकुलपुर मजरे चतुर्भुजपुर निवासी संयोजक अभिनव मिश्र के आवास पर दोपहर कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ। अवधी साहित्य संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पांडेय ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि हमारी हिंदी सागर से भी गहरी है, जो आज विश्व की भाषा बन चुकी है। गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरित मानस दुनिया का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है। हमें निज भाषा व देश पर गर्व होना चाहिए।
काव्य गोष्ठी में डॉ. केशरी शुक्ल अविज्ञ की पंक्तियां मेरी संजीदगी मुझे कभी हंसने नहीं देती, तमन्ना दूर जाने की मुझे रुकने नहीं देती खूब पसंद की गई। अवधी के कवि अनीस देहाती ने पढ़ा कि अनीस है वही अफजल सभी परिंदों में, रंग जिस शख्स पर चढ़ जाए कबीरी साहब। कवि रामेश्वर सिंह निराश की पंक्तियां यदि बाण निकल कर प्रत्यंचा पर चढ़ जाएगा, तो सिंधु नदी की धारा का पानी बहना रुक जाएगा ने खूब वाहवाही लूटी।
ओज कवि अभिजीत त्रिपाठी ने पढ़ा कि बलिदान हुए पुरखे जिस खातिर, हमने मंदिर वहीं बनाया है। ओज कवि अनिरुद्ध मिश्र की पंक्तियां कभी अपनों को झुकने का दम नहीं रखते, दूसरों के लिए जज्बात कम नहीं रखते ने श्रोताओं की तालियां बटोरीं। कवयित्री रामकुमारी की पंक्तियां कब तक दर्द छिपाऊं राधा, कब तक दर्द छिपाऊं को श्रोताओं ने पसंद किया।
कवि शब्बीर अहमद सूरी, चंद्र प्रकाश पांडेय मंजुल, समीर मिश्र, अमर बहादुर सिंह अमर, आशुतोष गुप्ता, सुरेश चंद्र शुक्ल नवीन, पप्पू सिंह कसक आदि की रचनाओं ने खूब वाहवाही लूटी। गोष्ठी में कवियों को अंग वस्त्र व माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया। कवि गोष्ठी का संचालन अनिरुद्ध मिश्र ने किया। इस दौरान डॉ. दीपक मिश्र, राम लखन मिश्र, डॉ. अभिमन्यु पांडेय, रीता पांडेय, कालिका प्रसाद तिवारी, चंद्र शेखर शुक्ल आदि मौजूद रहे।