अमेठी सिटी। एआरटीओ कार्यालय अब नियमों से नहीं, कुछ खास चेहरों के इशारों से चलता है। सरकारी शुल्क की सूची महज औपचारिकता बन कर रह गई है। असल रेट कार्ड साहब के इर्द-गिर्द घूमने वाले खास लोगों ने तय कर रखा है।
बुधवार दोपहर 12:30 बजे कार्यालय के पहले तल पर कुछ आवेदक निराश खड़े दिखे, वहीं दूसरे तल पर ड्राइविंग लाइसेंस की लाइन में लगे लोग झुंझलाए नजर आए। आवेदकों ने बताया कि बिना खास बाबू की सहमति के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती। कार्यालय में प्रतिदिन औसतन 40 ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं लेकिन अधिकांश आवेदक तय शुल्क के बावजूद बार-बार लौटाए जा रहे हैं।
देरी, त्रुटि और तकनीकी आपत्ति का बहाना बनाकर उन्हें सुविधा शुल्क देने के लिए मजबूर किया जाता है। स्थिति अब इतनी बिगड़ चुकी है कि वर्षों से तैनात स्थायी कर्मचारी भी खुद को हाशिये पर पा रहे हैं। एक विभागीय कर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सारे काम तो साहब के निजी कर्मी के पास हैं। हम लोग तो सिर्फ दिखावे के लिए बैठे हैं। फाइल कब बढ़ेगी, किसकी रुकेगी, सब बाहर से तय होता है।
एक हजार दोगे तो आज ही हो जाएगा काम
कार्यालय में मौजूद गौरीगंज के मऊ निवासी गौरीशंकर ने बताया कि वह वाहन का पंजीयन बदलवाने के लिए एक माह से परेशान हैं। फीस जमा कर चुके हैं। एक निजी कर्मी ने कहा कि एक हजार दोगे तो आज ही बन जाएगा। मैंने सुविधा शुल्क नहीं दिया इसलिए काम नहीं हुआ। बरौलिया गांव के गुड्डू ने बताया कि बताया कि पांच दिन से वाहन की एनओसी के लिए आ रहा हूं। हर बार नया बहाना सुनने को मिल रहा है। फॉर्म में कोई कमी नहीं है, फिर भी काम नहीं किया जा रहा।
व्यवस्था के सुधार की दिशा में प्रयास जारी
कार्यालय में व्यवस्था सुधारने की दिशा में लगातार प्रयास हो रहे हैं। कोई कर्मचारी अवैध वसूली करता पाया गया तो उसपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शिकायत करने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। किसी को भी कोई परेशानी हो तो वह सीधे उनसे संपर्क कर सकता है।
- महेंद्र बाबू, एआरटीओ प्रशासन