गौरीगंज के पूरे जगन पाठक का पुरवा गांव में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु।
अमेठी सिटी। सांसारिक बंधन में हम जितना बंधेंगे, उतना ही पाप हमारे नजदीक पहुंचता है। इसलिए सांसारिक बंधन से मुक्त होकर परमात्मा की शरण में जाने से ही जीवन रूपी नैया पार हो सकेगी। ये बातें गौरीगंज के पूरेजगन पाठक का पुरवा मजरे टिकरिया में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन प्रवाचक आचार्य डॉ. रघुपति त्रिपाठी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहीं।
प्रवाचक ने बताया कि कृष्ण विष्णु के अवतार हैं। भगवान विष्णु मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख देवता हैं। जब-जब पृथ्वी पर असुर और राक्षसों का आतंक बढ़ता है, भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर उनका संहार करते हैं। भगवान विष्णु ने 23 अवतार धारण किए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण के माने जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेते ही कर्म का चयन किया। बताया कि भगवान कृष्ण के जन्म के छठे दिन कंस ने राक्षसी पूतना को मारने के लिए भेजा। भगवान ने पूतना के पूर्व जन्म की इच्छा पूरी करते हुए उसका उद्धार किया।
प्रवाचक ने कहा कि व्यक्ति को हमेशा धर्म के मार्ग पर चलकर समाज सेवा में आगे आना चाहिए। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश देकर हमें कर्मयोग का ज्ञान सिखाया। साथ ही संदेश दिया कि प्रत्येक व्यक्ति को कर्म के माध्यम से जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। इस मौके पर यजमान नरेंद्र कुमार मिश्र, सरोज मिश्रा, जनार्दन प्रसाद शुक्ल, राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, अवनीश शुक्ल, बद्रीपाल मिश्र, करुणा शंकर मिश्र आदि मौजूद रहे।