अमेठी सिटी। जिले के 200 को-लोकेटेड परिषदीय स्कूलों में बच्चों को डेस्क बेंच की सुविधा मिलने में नौ माह लग गए। कड़ाके की ठंड में बच्चे ठिठुरते हुए जमीन पर बैठकर पढ़ने को विवश रहे। लेकिन अफसर संजीदा नहीं हुए। बाल मैत्री फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए शासन स्तर से अप्रैल 2025 में ही 50 लाख रुपये का बजट जारी कर दिया था। इसके बावजूद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर विद्यालयों में फर्नीचर आपूर्ति पहुंचाने में अनावश्यक देरी की गई। बीएसए संजय कुमार तिवारी का कहना है कि अब डेस्क बेंच स्कूल पहुंच गए हैं, जिनके सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है।
जिले में 1570 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें कई विद्यालय परिसरों में आंगनबाड़ी केंद्र भी चल रहे हैं, जहां छह वर्ष तक की आयु के बच्चों को खेल गतिविधियों के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा दी जाती है। राज्य परियोजना निदेशालय स्तर से इन केंद्रों पर बाल मैत्री फर्नीचर उपलब्ध कराने के निर्देश जारी हुए थे। 28 मार्च 2025 को 200 विद्यालयों के लिए 50 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था, लेकिन सीमित समय और वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कारण यह राशि वापस चली गई। इसके बाद नए वित्तीय वर्ष अप्रैल 2025 में योजना के लिए फिर 50 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ।
इस बजट से प्रत्येक चयनित विद्यालय को पांच-पांच फर्नीचर दिए जाने थे। बजट मिलने के बाद अनुमोदन और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने में करीब पांच माह का समय लग गया। सितंबर में बेसिक शिक्षा विभाग ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर फर्नीचर आपूर्ति के लिए आजाद इंटरप्राइजेज का चयन किया। फर्म चयन के चार माह बीतने के बाद विद्यालयों में फर्नीचर पहुंचे। इस बीच भीषण ठंड में बच्चों को ठिठुरना पड़ा, लेकिन अफसरों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।