अमेठी सिटी। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य की सभी इच्छाओं को पूरा करती है। यह कल्पवृक्ष के समान है। इसके लिए मनुष्य को निर्मल भाव से कथा सुनने और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। भगवान को कहीं खोजने की जरूरत नहीं। वह सबके हृदय में मौजूद हैं। ये बातें रविवार को अमेठी के ककवा मार्ग स्थित निजी लॉन में भागवत कथा के दूसरे दिन प्रवाचक ओमानंद महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि भागवत कथा ही साक्षात कृष्ण है और जो कृष्ण है, वही साक्षात भागवत है। भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। भागवत की महिमा सुनाते हुए कहा कि एक बार नारदजी ने चारों धाम की यात्रा की, लेकिन उनके मन को शांति नहीं हुई। नारदजी वृंदावन धाम की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक सुंदर युवती की गोद में दो बुजुर्ग लेटे हुए थे, जो अचेत थे। युवती बोली, महाराज मेरा नाम भक्ति है। यह दोनों मेरे पुत्र हैं, जिनके नाम ज्ञान और वैराग्य हैं। यह वृंदावन में दर्शन करने जा रहे थे, लेकिन बृज में प्रवेश करते ही यह दोनों अचेत हो गए। आप इन्हें जगा दीजिए।
इसके बाद देवर्षि नारदजी ने चारों वेद, छह शास्त्र और 18 पुराण व गीता पाठ भी सुना दिया, लेकिन वह नहीं जागे। नारद ने यह समस्या मुनियों के समक्ष रखी। ज्ञान, वैराग्य को जगाने का उपाय पूछा।