अमेठी सिटी। सिंहपुर के उसरहा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन बृहस्पतिवार को प्रवाचक डॉ. शैलेंद्राचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत साक्षात भगवान का स्वरूप है। इसके पाठ से मन को शांति मिलती है और जीवन में दृढ़ता बढ़ती है। उन्होंने बताया कि ब्रह्म सत्य है, जबकि जगत क्षणिक है। आत्मा जन्म-मरण के बंधन से तभी मुक्त होती है जब मनुष्य भक्ति मार्ग अपनाते हुए सत्कर्म करता है।
प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत के श्रवण से मन का क्लेश कम होता है। सुदामा चरित्र का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान कृष्ण के परम मित्र सुदामा सादगी, संतोष और भक्ति के प्रतीक हैं। सीमित साधनों के बीच जीवन बिताने के बावजूद उनका मन हमेशा भगवान में रमा रहा। पत्नी सुशीला के आग्रह पर जब वह द्वारिका पहुंचे तो भगवान कृष्ण ने उन्हें स्नेहपूर्वक गले लगाया। मित्रता के इस प्रसंग से जीवन में प्रेम, विनम्रता और त्याग का संदेश मिलता है।
प्रवाचक ने बताया कि जैसा जीवन जिया जाता है, वैसी ही मृत्यु मिलती है। सत्संग, भक्ति और ईश्वर की शरण से जीवन के मार्ग स्पष्ट होते हैं। महर्षि वेदव्यास ने भागवत पुराण में भगवान विष्णु के अवतारों, श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, रासलीला, कंस वध और गीता उपदेश सहित अनेक प्रसंगों का विस्तृत वर्णन किया है। यह ग्रंथ धर्म, नीति और जीवन मूल्यों का आधार माना जाता है। इस मौके पर विकास यादव, राजेंद्र गुप्ता, कमलेश्वर पाठक, गोपी बाजपेई, विजय नारायण शुक्ला, अवधेश तिवारी, देवेंद्र यादव, अशोक कुमार तिवारी, शिवमोहन चौरसिया आदि मौजूद रहे।