गौरीगंज कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन करते सपा मजदूर सभा के पदाधिकारी। -संवाद
अमेठी सिटी। श्रम कानून और मनरेगा के नाम में बदलाव से नाराज समाजवादी मजदूर सभा के पदाधिकारियों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट रामकेवल को सौंपा।
मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता प्रमोद पटेल ने कहा कि मनरेगा का नाम पूर्ववत रखा जाना चाहिए। उन्होंने मनरेगा श्रमिकों को श्रमिक का दर्जा देने, न्यूनतम मजदूरी एक हजार रुपये प्रतिदिन निर्धारित करने, वर्ष में 300 दिन का रोजगार देने और योजना के बजट का बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार के पास रहने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
राष्ट्रीय सचिव सुरेश यादव ने नए श्रम कानून का कड़ा विरोध जताया। कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में 12 घंटे की कार्य अवधि, न्यूनतम वेतन की स्पष्ट गारंटी का अभाव, सामाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी नियोक्ताओं पर छोड़ना, हड़ताल के अधिकार में कटौती और संगठन निर्माण की प्रक्रिया को जटिल बनाना मजदूर वर्ग के हितों के विपरीत है। उनके अनुसार यह प्रणाली मजदूरों की आजादी पर सीधा प्रहार करती है।
सपा महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष गुंजन सिंह ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान है। भाजपा सरकार महापुरुषों का अपमान कर रही है। समाजवादी मजदूर सभा के जिलाध्यक्ष वसीम अहमद ने कहा कि वर्ष 2027 में सपा की सरकार बनने पर मजदूरों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर किया जाएगा। उन्होंने मजदूर हितों की रक्षा का भरोसा दिलाया। इस मौके पर चंद्रकांत पाल, अनुज यादव, राम अवध गौतम, मनीराम वर्मा, चंद्रशेखर यादव, केडी सरोज आदि मौजूद रहे।