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Amethi News: साहब! ढाई माह से ठप हैं ऑपरेशन

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जिला चिकित्सालय में बंद हुई सीजेरियन डिलीवरी,
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अमेठी। गौरीगंज स्थित मलिक मोहम्मद जायसी संयुक्त जिला चिकित्सालय में करीब ढाई माह से एक भी सिजेरियन प्रसव नहीं हो पाया है। प्रसूताएं निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं। वहीं, निजी अस्पतालों का खर्च न उठा पाने वाली प्रसूताओं को 40 किलोमीटर दूर गैर जनपद मेें सीजेरियन डिलीवरी के लिए जाना पड़ रहा है। वजह, ढाई माह पूर्व डॉ. सीताराम कनौजिया के स्थानांतरण के बाद से यह व्यवस्था ठप हो गई। इससे पूर्व यहां प्रतिमाह 30 से 35 सिजेरियन डिलीवरी होती थी।
मंगलवार को पहली बार जनपद आ रहे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक दोपहर करीब पौने तीन बजे यहां निरीक्षण करेंगे। जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि प्रतिदिन रोस्टर के अनुसार सीएचसी को संबद्ध किया है। इसी व्यवस्था के तहत प्रसूताओं को चिकित्सीय परामर्श दी जाती है। सिजेरियन डिलीवरी फिलहाल बंद है। वहीं सोमवार को डीएम राकेश कुमार मिश्र ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया।
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स्टॉफ की कमी बन रही रोड़ा
जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टॉफ की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। वर्तमान में चिकित्सा अधीक्षिका समेत चिकित्सक संवर्ग के 34 स्वीकृत पदों में से 18 पद रिक्त चल रहे हैं। जनरल फिजीशियन के दो स्वीकृत पदों के बावजूद मात्र एक ही डॉक्टर तैनात हैं। पूर्व में तैनात एक फिजीशियन रात्रि विश्राम भी अस्पताल के आवासीय परिसर में ही करते थे। उनके स्थानांतरण से लोगों को देर रात निजी अस्पतालों के साथ गैर जनपदीय सरकारी अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ता है। वहीं, पैरामेडिकल स्टॉफ के स्वीकृत 66 में 29 पदों पर ही तैनाती है। स्टॉफ नर्स के 30 पदों पर मात्र 17 ही कार्यरत हैं।


अधर में लटका है ब्लड बैंक
अस्पताल के ब्लड बैंक की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पाई है। फ्रीजर खरीद की प्रक्रिया चल रही है। सूत्रों की मानें तो फ्रीजर आने के बाद अन्य कागजी कार्यवाही पूरी करने में अभी करीब एक माह का समय लग सकता है।
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सरकारी पर्चे पर लिख रहे बाहर से दवाएं
सोमवार को जिला चिकित्सालय में हाथ का इलाज कराने पहुंची साजिदा बेगम ने बताया कि अस्पताल में दवाएं खत्म हो गई हैं। इसलिए डॉक्टर साहब ने पर्चे पर ही कुछ दवाएं लिख दी हैं। इन जरूरी दवाओं को बाहर से खरीदकर खाने को कहा है। वहीं, अस्पताल परिसर में मौजूद जनऔषधि केंद्र की पड़ताल करने पर पता चला कि प्रतिमाह बड़ी संख्या में मरीज 10 से 20 हजार की दवाएं वापस कर बाहर से महंगी दवाएं खरीदकर खाते हैं। सूत्रों की मानें तो परिसर में निजी अस्पतालों के एजेंट सक्रिय हैं, जो यहां आने वाले मरीजों को गुमराह कर देते हैं।

उपमुख्यमंत्री से ये हैं उम्मीदें
- जिला चिकित्सालय में स्त्री रोग विशेषज्ञ की स्थायी तैनाती
- ब्लड बैंक की स्थापना
- रिक्त पद पर जनरल फिजीशियन व हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती
- रात में आपातकालीन व्यवस्था में हो सुधार
- बाहर से दवा खरीद पर लगे रोक
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