जामों (अमेठी)। श्रीमद्भागवत केवल एक पवित्र ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का दर्पण है। यह मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर, मोह से मोक्ष की ओर और संसार से परमार्थ की ओर ले जाती है। जीवन के हर संकट का समाधान भागवत महापुराण है। ये बातें क्षेत्र के हरगांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शुक्रवार को प्रवाचक राजेश तिवारी निर्मोही ने कहीं।
प्रवाचक ने नारदजी के प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि त्रिलोक में सबसे दुर्लभ श्रीमद्भागवत कथा है, जो केवल सौभाग्यशाली लोगों को सुनने और समझने को मिलती है। भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन हमें जीवन की सच्ची राह दिखाती है। जीवन का मुख्य आधार ही यह चारों ग्रंथ माने गए हैं। सांसारिक यात्रा के दौरान हम सभी को किस प्रकार से परमात्मा की भक्ति करनी है। जीवन जीने का आधार क्या है।
यह सब इन चार ग्रंथों में बताया गया है। महाभारत ग्रंथ से हमें घर-परिवार व सामाजिक तौर पर कैसे रहना है, इसकी शिक्षा मिलती है। इसी प्रकार रामायण से हमें जीवन किस प्रकार से जीना है। गीता से हमें शिक्षा मिलती है कि अंत में संसार से हमें कैसे जाना है। इसी प्रकार श्रीमद्भागवत महापुराण से हमें यह शिक्षा मिलती है कि शिष्य जब तक गुरु के प्रति समर्पित नहीं हो जाता, तब तक गुरु का ज्ञान हमारे हृदय में नहीं उतर सकता। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।