सिंहपुर क्षेत्र के उसरहा गांव में श्रीमद्भागवत सुनतीं महिलाएं। संवाद
अमेठी सिटी। सिंहपुर क्षेत्र के उसरहा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को अयोध्या कालिका धाम पीठाधीश्वर डॉ. शैलेंद्राचार्य महाराज ने जीवन मूल्यों पर आधारित प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य का हृदय संसार रूपी सागर के समान है, जहां अच्छे और बुरे विचार देवता तथा दानव की भांति संघर्ष करते हैं। कथा मनुष्य को मोह-माया से दूर रहते हुए सत्कर्म अपनाने की प्रेरणा देती है।
प्रवाचक ने कहा कि मनुष्य के पाप-पुण्य का फल इसी जीवन में मिलता है। इससे मनुष्य को अपने कर्मों का बोध होता है। भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को जीवन की त्रिवेणी बताते हुए उन्होंने कहा कि इन मार्गों से व्यक्ति सही दिशा प्राप्त करता है। डॉ. शैलेंद्राचार्य ने बताया कि श्रीकृष्ण की भक्ति पाप विमोचन का मार्ग है। संकट के समय आस्था मनुष्य को दृढ़ बनाती है। ध्रुव की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि धैर्य और समर्पण से लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। ध्रुव ने कठोर तप किया और अपनी इच्छा पूर्ण कर भगवान को प्राप्त किया। इससे सीख मिलती है कि कठिनाइयों को अवसर में बदलना चाहिए।
प्रह्लाद और नरसिंह अवतार प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अत्याचार समाप्त हो जाता है, मगर भक्ति की शक्ति स्थिर रहती है। भगवान नरसिंह का अवतार प्रह्लाद की रक्षा और धर्म की स्थापना का प्रतीक है। इस मौके पर बब्बू तिवारी, दीपू शुक्ला, अमरेश तिवारी, बृजेश तिवारी, मो. मासूम, प्रदीप तिवारी, करुणेश अग्निहोत्री, तुषार त्रिवेदी, संतोष दुबे, अविनाश शर्मा, अमरेश कुमार तिवारी एडवोकेट, अखिलेश कुमार तिवारी, अनुपम तिवारी आदि मौजूद रहे।