अमेठी सिटी। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की सख्ती के बावजूद घूसखोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। पिछले पांच साल के आंकड़ों पर गौर करें तो डीपीआरओ सहित सात अफसर व कर्मचारी रंगे हाथों घूस लेते पकड़े जा चुके हैं। लाख कवायद के बावजूद रिश्वतखोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। इसके चलते खासकर पुलिस, पंचायत और राजस्व विभाग के कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
ताजा मामला इन्हौंना थाने का है। यहां तैनात उपनिरीक्षक राजेश चंद्र पाल को एसीबी टीम ने मंगलवार को 15 हजार रुपये घूसे लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि सड़क दुर्घटना के एक प्रकरण में पक्ष में रिपोर्ट लगाने के एवज में रकम मांगी गई थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी टीम सक्रिय हुई और थाने के पास चाय की दुकान पर जाल बिछाया गया। जैसे ही रकम सौंपी गई, टीम ने दरोगा और माध्यम बने दुकानदार को दबोच लिया।
इससे पहले संग्रामपुर थाने में तैनात दरोगा कर्मवीर सिंह को लखनऊ के फीनिक्स पलासियो मॉल में 30 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि चार्जशीट दाखिल करने के नाम पर रकम मांगी गई थी। एसीबी ने गेट नंबर सात पर ट्रैप कर उसे पकड़ा था। केवल पुलिस ही नहीं, राजस्व और पंचायत विभाग भी कार्रवाई की जद में आए। 11 दिसंबर 2025 को अमेठी तहसील में तैनात लेखपाल अमित कुमार को आठ हजार रुपये घूस लेते पकड़ा गया। किसान को किराये के कमरे में बुलाकर रकम ली गई थी।
इसके पहले 17 जून 2021 को गौरीगंज में तत्कालीन डीपीआरओ को 30 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2023 में गौरीगंज में जिला समन्वयक समेकित शिक्षा संतोष सिंह शिक्षक से मेडिकल बनवाने के नाम पर पांच हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़े गए।
उसी वर्ष लेखपाल दुर्गा प्रसाद मिश्रा खतौनी में नाम दुरुस्त करने के नाम पर पांच हजार रुपये घूस लेते पकड़े गए। वर्ष 2021 से 2026 तक भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सात मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन रिश्वतखोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। (संवाद)