संग्रामपुर में तर्पण के बाद चींटियों को आटा और अन्न डालते श्रद्धालु। स्रोत : स्थानीय
अमेठी। पितृ पक्ष के सातवें दिन शनिवार को जिले में पूर्वजों के स्मरण के साथ जीवों के प्रति दया और सेवा का भाव भी दिखाई दिया। घरों में श्राद्धकर्म और तर्पण के बाद कई परिवारों ने बच्चों के साथ चींटियों को आटा खिलाया। बुजुर्गों ने बच्चों को जीवों के प्रति संवेदना रखने और जरूरतमंदों की मदद करने की सीख दी।
लोगों ने पितरों के निमित्त जल और तिल अर्पित किए। ब्राह्मणों को भोजन कराया गया। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा देने के साथ घर के आसपास चींटियों के लिए आटा और अन्न के छोटे-छोटे कण डाले गए। कई परिवारों में बच्चे भी इस परंपरा में शामिल हुए।
आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृ पक्ष में तर्पण, श्राद्ध और दान के साथ जीव-जंतुओं को भोजन कराने की भी परंपरा है। चींटियों को आटा या अन्न खिलाना इसी भावना से जुड़ा है। पितृ पक्ष केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं है। यह पूर्वजों को याद करने के साथ सेवा, दया और परोपकार की भावना को आगे बढ़ाने का अवसर भी देता है।
श्राद्धकर्म कर रहे शिवनाथ तिवारी ने कहा कि पूर्वजों को याद करने के साथ जरूरतमंदों और जीव-जंतुओं के लिए कुछ करना मन को संतोष देता है। दया शंकर पांडेय ने कहा कि चींटियों को आटा खिलाने जैसी छोटी परंपराएं बच्चों में दया और सेवा का भाव विकसित करती हैं। रामलखन शुक्ल ने कहा कि श्राद्ध के माध्यम से पूर्वजों को याद करने के साथ उनकी अच्छी परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जाता है।