अमेठी सिटी। कंपोजिट विद्यालय बेलखौर गौरीगंज की विज्ञान शिक्षिका संध्या शुक्ला ने दृढ़ संकल्प से चुनौतियों को अवसर में बदला है। उन्होंने सीमित संसाधनों वाले सरकारी विद्यालय में विज्ञान शिक्षण को एक नया स्वरुप दिया। उनके प्रयासों से विद्यार्थियों के साथ-साथ समाज में भी सकारात्मक संदेश पहुंचा है।
वर्ष 2015 में शिक्षिका का पद संभालने के बाद संध्या शुक्ला ने महसूस किया कि विज्ञान विषय को लेकर अनेक विद्यार्थियों में झिझक और अरुचि थी। कक्षा में उपलब्ध साधनों की कमी भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे माहौल में उन्होंने परिस्थितियों को स्वीकार करने के बजाय समाधान तलाशने का निर्णय लिया।
उन्होंने स्वयं मॉडल तैयार किए, चार्ट विकसित किए और वीडियो आधारित सामग्री का उपयोग शुरू किया। विज्ञान की जटिल अवधारणाओं को प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से समझाने का प्रयास किया। विद्यार्थियों की जिज्ञासा बढ़ी और कक्षाओं में उनकी सहभागिता मजबूत हुई।
विद्यालय के बच्चों ने विभिन्न विज्ञान प्रदर्शनियों में बेहतर प्रदर्शन करना शुरू किया। इस वर्ष जनपद स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में विद्यालय ने चौथा स्थान प्राप्त किया। यह उनकी शिक्षण पद्धति की सफलता का प्रमाण है। संध्या शुक्ला की सफलता केवल शैक्षिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है।
उन्होंने यह संदेश भी दिया कि प्रतिबद्धता, मेहनत और रचनात्मक सोच के बल पर कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। उनकी यह यात्रा उन महिलाओं के लिए एक प्रेरक उदाहरण है, जो जिम्मेदारियों और चुनौतियों के बीच अपने सपनों को साकार करने का प्रयास कर रही हैं। उनका नवाचार सरकारी विद्यालयों में शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने का मार्ग दिखाता है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है।