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Amethi News: चेन्नई से गांव लौटकर लिखी सफलता की नई इबारत

Sun, 08 Mar 2026 12:08 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
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अमेठी सिटी। चेन्नई में पली-बढ़ी गायत्री सात साल पहले जब अपने पैतृक गांव गौरीगंज के लुगरी लौटी तो उन्होंने खुद के साथ ही गांव की बाकी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने की ठानी। इसके लिए गायत्री ने दोना पत्तल बनाने का काम शुरू किया। साथ ही महिलाओं को पशुपालन और डेयरी के काम से भी जोड़ा। वर्तमान में उनकी अगुवाई में 12 परिवार की महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर खुद के साथ परिवार का भरणपोषण करने में मददगार साबित हो रही हैं।
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जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह को वर्ष 2022 में स्टार्टअप और रिवाल्विंग फंड के रूप में 17500 रुपये मिले। इसमें समूह की बचत को मिलाकर गायत्री ने दोना पत्तल बनाने का काम शुरू किया। कानपुर से मशीन और बाजार से कच्चा माल खरीदकर घर पर इसकी शुरुआत की। बेहतर परिणाम मिलने पर समूह की अन्य महिलाओं को भी इस काम से जोड़ना शुरू किया। उनके पति शिव प्रसाद तैयार दोना पत्तल की आपूर्ति बाजार में सुनिश्चित कराते हैं। इस काम से गायत्री हर माह आठ से दस हजार रुपये की आय अर्जित कर लेती है। 10 हजार रुपये की बचत हो जाती है।


दूसरों को भी बना रही आत्मनिर्भर
समूह में काम करने वाली अन्य महिलाओं को भी गायत्री आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ा रही हैं। गांव की सुंदरा, पूजा और ऊषा सरोज बकरी पालन से कमाई कर रही हैं। बचल्ला, प्रभावती, रामपती भैंस पालन से घर खर्च चला रही हैं। गायत्री अपने माता-पिता के साथ चेन्नई में रहती थी। वह सातवीं तक पढ़ी हैं। 14 साल पहले उनकी शादी हुई थी। पति भी उन्हीं के पास चेन्नई जाकर मेहनत मजदूरी करने लगे। सात साल पहले माता-पिता की मौत होने के बाद उन्हें मजबूरन गांव लौटना पड़ा। घर पर कोई भी कुशल कामगार नहीं था। ऐसे में उन्होंने आगे आने की ठानी। उनके तीन बच्चे हैं। तीनों ही गौरीगंज में प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे हैं।
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