जामों (अमेठी)। भगवान श्रीराम का चरित्र हमें मर्यादा में रहना सिखाता है। मनुष्य को अपने जीवन में हमेशा मर्यादित रहकर कार्य करना चाहिए। श्रीराम कथा सुनने मात्र से मनुष्य जीवन में बदलाव आने के साथ कल्याण संभव होता है। ये बातें ग्राम पंचायत बाबूपुर के रेवडापुर गांव स्थित दंडी धाम में आयोजित श्रीराम कथा के अंतिम दिन परमात्मा मठ प्रयागराज के प्रवाचक अजय शास्त्री महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने बताया कि रामायण मनुष्य को जीने की कला सिखाती है। दूसरे की संपत्ति कितनी भी मूल्यवान क्यों न हो, उसको हमेशा मिट्टी समझना चाहिए। उसको कभी अपना नहीं समझना चाहिए। बताया कि भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद अयोध्या आए तो अयोध्यावासी खुशी से झूम उठे। रामायण हमेशा लोगों को आदर, सेवाभाव एवं बलिदान का पाठ पढ़ाती है। राज्याभिषेक का वर्णन करते हुए बताया कि बुराई एवं असत्य अधिक दिन नहीं टिक पाता है। अंत में सत्य की ही जीत होती है। अधर्म पर धर्म हमेशा भारी पड़ता है। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।