शाहगढ़ (अमेठी)। स्थानीय विकास खंड के पूरे बलुवन मजरे कुशबैरा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन प्रवाचक अनिलेश शास्त्री ने विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। बताया कि भगवान कृष्ण ने दुर्योधन के 56 प्रकार के भोजन त्याग कर विदुर के घर शाक-रोटी ग्रहण की।
प्रवाचक ने सती चरित्र, शिव विवाह का प्रसंग सुनाया। बताया कि जिस प्रकार से चंदन के वृक्ष में शीतलता और सुगंध होती है, उसी प्रकार मनुष्य को भी पांच तरह की सेवाएं करनी चाहिए, जिसमें संन्यास, गृहस्थ, वानप्रस्थ, स्त्री धर्म और दान सेवा करनी चाहिए। यह सेवाएं करने से मनुष्य का जीवन सुखमय और आनंदमय हो जाता हैं।
प्रवाचक ने कहा कि महाभारत में अन्याय और न्याय की लड़ाई हुई। विदुर ने धृतराष्ट्र को पांडवों के साथ अन्याय न करने की सलाह दी, लेकिन धृतराष्ट्र ने न्याय को छोड़ पुत्र मोह में अन्याय का रास्ता चुना। आखिरकार उनका पुत्र मोह में लिया गया निर्णय परिवार के विनाश का कारण बना। अन्याय के रास्ते पर चलने से विनाश होता है। इस मौके पर जगदंबा प्रसाद त्रिपाठी मनीषी, जगदीश प्रसाद मिश्र, संदीप मिश्र, दयाशंकर शुक्ला, अशोक कुमार मिश्र, गोविंद सिंह, जय करन सिंह, राजाराम यादव आदि मौजूद रहे।