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संघर्ष के बूते प्रियंका के दिल में उतरीं रमाकांती

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गौरीगंज (अमेठी)। रायबरेली में आयोजित महिला शक्ति संवाद कार्यक्रम में जिस रमाकांती को प्रियंका ने अपनी सहेली बताया, वे अमेठी के बेसारा पश्चिम गांव की रहने वाली हैं। रमाकांती का इतिहास संघर्ष भरा है। कुछ अलग करने की इसी सोच व संघर्ष का नतीजा ही है कि रमाकांती न सिर्फ प्रियंका के दिल बल्कि उनकी कहानी तक में अपना स्थान बनाने में कामयाब रहीं।
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कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने बीते दिनों 19 दिसंबर को रायबरेली के रिफॉर्म क्लब में महिला शक्ति संवाद कार्यक्रम के मंच से मौजूद महिलाओं को रमाकांती नाम की एक महिला के संघर्ष की कहानी सुनाई थी। प्रियंका ने महिलाओं से कहा कि रमाकांती ने जिस तरह का संघर्ष किया, वह अपने आप में साहस की मिसाल था। अपने परिवार के विरोध के बावजूद रमाकांती ने न सिर्फ अपनी बेटी को पढ़ाया, बल्कि स्वयं संघर्ष कर पूरे परिवार का खर्च भी चलाया।
प्रियंका ने कहानी सुनाने के दौरान रमाकांती को अपनी सहेली भी बताया। हजारों महिलाओं की मौजूदगी में भरे मंच से जिस रमाकांती को प्रियंका ने अपनी सहेली बताया, वह अमेठी के मुसाफिरखाना तहसील के बेसारा पश्चिम गांव की रहने वाली हैं। रमाकांती ने बताया कि प्रियंका से उनकी पहली मुलाकात 2003 में एक कार्यक्रम के दौरान दिल्ली में हुई। महिला सशक्तीकरण के इस 10 दिवसीय कार्यक्रम में प्रियंका के नेतृत्व की जो टीम प्रथम आई थी, उसमें वे भी शामिल थीं।
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इसके बाद तो प्रियंका से कई मुलाकातें हुईं। जब भी मिली प्रियंका ने आगे बढ़कर गले से लगाया। रमाकांती ने कहा कि प्रियंका ने उनके संघर्ष की कहानी सुनाकर, न सिर्फ उनके संघर्ष का मान बढ़ाया बल्कि अमेठी के लोगों से अपने पारिवारिक रिश्ते को परिलक्षित भी किया। रमाकांती ने कहा कि पिता गोपीनाथ ने कम उम्र में ही मेरा विवाह 90 के दशक में बेसारा पश्चिम निवासी उमेश विश्वकर्मा से कर दिया। 1993 में बेटी पैदा हुई, उसका नाम रखा नीतू।
मैं ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी। बेटी पैदा हुई तो तय किया कि इसे कॉलेज तक पढ़ाऊंगी। ससुराल के लोगों ने इस फैसले का विरोध किया। विरोध की धार को कुंद किया जा सके इसके लिए उन्होंने मेहनत करने की ठानी। कई साल साड़ी में फॉल लगाकर परिवार का खर्च चलाया। 2003 में समूह ज्वाइन किया। आज मेरे समूह में 11 महिलाएं हैं। समूह से होने वाली आय के बूते पति व पुत्र को मुसाफिरखाना में व्यवसाय कराया। बेटी का विवाह किया, शादी के बाद भी उसकी पढ़ाई लिखाई जारी रखवाई।
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