सिंहपुर। सतगवां (तिवारीपुर) में आयोजित मानस मंगल महोत्सव में प्रवाचक पूर्णिमा तिवारी ने भगवान श्रीराम के विवाहोत्सव का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जनकपुर में राजा जनक की पुत्री सीता का स्वयंवर रचा गया।
इसमें शर्त थी कि जो राजा शिवजी के धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा, वही सीता का वरण करेगा। अनेक राजाओं ने प्रयास किया, मगर कोई सफल नहीं हुआ। तभी गुरू विश्वामित्र के संग अयोध्या के राजकुमार श्रीराम वहां पहुंचे। राम ने गुरू की आज्ञा लेकर सहज भाव से धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गया। आकाश से पुष्पवर्षा हुई और सीताजी ने वरमाला श्रीराम के गले में डाल दी।
इससे मिथिलानगरी में हर्ष और उल्लास छा गया। जनकजी ने अपनी दूसरी बेटियों उर्मिला, मांडवी और श्रुतकीर्ति का विवाह क्रमशः लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न से कराया। इस प्रकार अयोध्या और मिथिला के बीच प्रेम और धर्म का अटूट बंधन जुड़ गया। इस दौरान आयोजक गिरिराज यादव, अवनींद्र सिंह, लल्लू बाबू, मनीष, सुरेंद्र, ऋषि, पंकज, सतेंद्र, सत्येश त्रिपाठी, रमादत्त शुक्ला, सचिन आदि मौजूद रहे।