जायस स्थित दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर में चल रही श्रीराम कथा सुनतीं महिला श्रद्धालु। आयोजक
फुरसतगंज (अमेठी)। जायस स्थित दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन प्रवाचक आराधना देवी ने कहा कि सृष्टि की सभी लीलाएं परमात्मा की ही रचना हैं। मनुष्य जाति के उद्धार के लिए भगवान बार-बार इस धरती पर अवतरित होते हैं। उन्होंने राम नाम को जीवन का वास्तविक धन बताया और कहा कि यह नाम परलोक में भी काम आता है। जैसे हम बैंक में धन जमा करते हैं, वैसे ही जीवन में राम नाम का संचय करना चाहिए।
प्रवाचक ने कहा कि वर्तमान समय में पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण से समाज अपने मूल्यों और परंपराओं से दूर होता जा रहा है। ऐसे समय में रामकथा जैसे आयोजनों से हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और आत्मसात करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने श्रीराम के बालरूप की मधुर झांकी प्रस्तुत करते हुए बताया कि जब तक वह अपने नारायण स्वरूप में रहे, माता कौशल्या को मातृत्व का पूर्ण सुख नहीं मिला, लेकिन जैसे ही उन्होंने रोकर अपनी लीलाएं प्रारंभ कीं, कौशल्या मातृत्व के भाव से अभिभूत हो उठीं।
सुबह अयोध्या से पधारे विद्वान पं. महेश शास्त्री और उनके सहयोगियों ने विशेष वेद अनुष्ठान किया। इस मौके पर विपिन बिहारी अग्रवाल, विजय अग्रवाल, दिलीप शर्मा, अरविंद कौशल, विकास, अवधेश कौशल, डॉ. बरनवाल, सुभाष आदि उपस्थित रहे।