सिंहपुर (अमेठी)। हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व पृथ्वी दिवस न सिर्फ एक तिथि है, बल्कि यह एक चेतावनी है कि यदि अब भी नहीं चेते, तो भविष्य अंधकारमय हो सकता है। 1970 में पहली बार मनाए गए इस दिवस का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन को लेकर जनजागरूकता फैलाना है।
सेमरौता कस्बे के सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक श्रीकांत पांडेय ने कहा कि भूमि कटाव और भूस्खलन जैसी समस्याएं पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण बढ़ रही हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अधिक से अधिक पौधरोपण कर पृथ्वी को मजबूती दी जा सकती है। जितने ज्यादा पेड़ लगेंगे, उतना ही भूमि कटाव रुकेगा और धरती सुरक्षित होगी।
उन्होंने कहा कि धरती ही जीवन का आधार है, यह हमें वायु, जल, भोजन और प्राकृतिक संसाधन प्रदान करती है। लेकिन औद्योगीकरण और अनियंत्रित विकास के कारण आज जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, जल प्रदूषण और जैव विविधता में गिरावट जैसे गंभीर संकट उत्पन्न हो चुके हैं। ऐसे में पृथ्वी दिवस हमें अपनी जिम्मेदारियों की याद दिलाता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को आगे आना होगा।
नई पीढ़ी को जागरूक करना जरूरी
स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना आवश्यक है, ताकि युवा पीढ़ी शुरुआत से ही प्रकृति के प्रति संवेदनशील बन सके। विभिन्न संस्थाएं और संगठन इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए कई अभियान भी चलाए जा रहे हैं। प्लास्टिक का कम उपयोग, ऊर्जा की बचत, जल संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली जैसे छोटे-छोटे कदम धरती को बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।