बाजारशुकुल (अमेठी)। बिना भाव के भगवान कीमती चीजों को भी ग्रहण नहीं करते। यदि भाव से एक फूल ही चढ़ा दें तो प्रभु प्रसन्न हो जाते हैं। जिस व्यक्ति में ईश्वर प्रेम का भाव पैदा हो जाए तो उसे ईश्वर की लगन लगी रहती है। लोगों को धन को परमार्थ में लगाना चाहिए। ये बातें पांडेयगंज स्थित कॉलेज में आयोजित भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए प्रवाचक पलक किशोरी ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भवसागर पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला द्वारा ही जीवात्मा का परमात्मा से मिलन हुआ। श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण-रुक्मिणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं, उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है।
कथावाचक ने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है। इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है। यदि कोई कमी रहती है तो वह मात्र संकल्प की होती है। इस अवसर पर विजय शुक्ला, संजय, बद्री प्रसाद शुक्ला, महराजदीन शुक्ला, हरिकेश तिवारी, दिव्य तीर्थ मिश्र, अरविंद शुक्ल, सूर्य प्रकाश शुक्ला, चंद्रप्रकाश शुक्ला, प्रमोद शुक्ला, लक्ष्मी प्रकाश शुक्ला आदि उपस्थित रहे।