जामों (अमेठी)। ब्लाॅक क्षेत्र की ग्राम पंचायत घाटमपुर के रामनगर में स्थित दुर्गा माता मंदिर परिसर में श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। परमात्मा मठ प्रयागराज से आए प्रवाचक मानस मधुर अजय शास्त्री महाराज ने बृहस्पतिवार को पांचवें दिन कथा सुनाते हुए कहा कि अपने बच्चों को संस्कारवान बनाएं। इसके लिए उन्हें नियमित संस्कारयुक्त शिक्षा देनी होगी। माता-पिता के साथ ही परिजनों को इसके लिए तत्पर रहना होगा।
प्रवाचक ने कहा कि माता-पिता की आज्ञा का हमेशा पालन करना चाहिए। भगवान श्रीराम ने माता-पिता की आज्ञा मानकर ही राज वैभव का सुख त्याग कर वनगमन किया था। संस्कार की इससे बड़ी मिसाल और कोई नहीं हो सकती। सनातन धर्म देश के सभी धर्मों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। प्रवाचक ने विश्वामित्र का आगमन, पुष्प वाटिका, राम-सीता विवाह, वनगमन एवं भगवान श्रीराम व केवट संवाद सुनाकर श्रोताओं को भक्ति भाव में सराबोर कर दिया।
प्रवाचक ने कहा कि भगवान श्रीराम की कथा में बताया गया है कि परिवार में सभी के साथ मिलकर रहना चाहिए। विपरीत परिस्थिति में भी अपनों से दूरी नहीं बनानी चाहिए। कहा कि कैकेयी के हठ के चलते ही प्रभु श्रीराम को वन जाना पड़ा था। इसके बावजूद जब वह लंका दहन के बाद अयोध्या आए तो माता कैकेयी और मंथरा से बेहद अपनत्व भाव से मिलकर उन्हें सम्मान दिया था। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की समाज के प्रति जिम्मेदारी होती है। सभी को समाज के साथ-साथ गरीब लोगों की मदद करनी चाहिए।