अमेठी सिटी। पंचायत चुनाव को लेकर चल रही अटकलबाजी के बीच विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों का कार्यकाल क्रमश: 26 मई, 19 जुलाई और 11 जुलाई को समाप्त हो रहा है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची 15 अप्रैल को प्रकाशित होगी। अभी पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन और आरक्षण प्रक्रिया अधूरी है।
विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव होंगे, ऐसी संभावना के चलते लोगों के अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि सरकार डर गई है, इसीलिए पंचायत चुनाव बाद में कराने की तैयारी में है। सपा जिलाध्यक्ष राम उदित यादव ने कहा कि पंचायत चुनाव समय पर होने चाहिए। सरकार तानाशाही कर रही है। संविधान और कानून का राज नहीं है तो क्या किया जा सकता है। सरकार वैसे भी बदली जानी है। जिसकी सत्ता होती है, पंचायत चुनाव में उसी का दबदबा रहता है। आज चुनाव हो जाएं तो पंचायत चुनाव में सपा की भारी जीत होगी। वर्तमान में चुनाव करा दें तो भाजपा को बहुत नुकसान होगा।
बसपा के जिलाध्यक्ष सुरेश कमल ने कहा कि हार के डर से सरकार चुनाव नहीं कराना चाहती है। कार्यकर्ताओं में विरोध न हो जाए और विधानसभा प्रभावित न हो, इसीलिए चुनाव को आगे खिसकाया जा रहा है। एक वजह ये भी है कि विधानसभा चुनाव में नुकसान न हो, इसलिए भी चुनाव टाला जा रहा है। भाजपा को लगता है कि प्रदेश में सरकार बन जाएगी तो जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख हमारे बन जाएंगे।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंघल ने कहा कि सरकार चाहे केंद्र की हो या प्रदेश की, जनता दोनों से ऊब चुकी है। प्रदेश सरकार को अपनी हार का डर दिख रहा है। पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों को लेकर विरोध की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे विधानसभा चुनाव प्रभावित हो सकता है। इसीलिए पंचायत चुनावों को आगे खिसकाने की कोशिश की जा रही है। जनता सब देख और सुन रही है। आगे कोई भी चुनाव हो, भाजपा को हार का ही सामना करना पड़ेगा।
शत-प्रतिशत जीतेगी भाजपा
भाजपा जिलाध्यक्ष सुंधाशु शुक्ल ने कहा कि 2027 के चुनाव में भाजपा शत-प्रतिशत चुनाव जीतेगी। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसीलिए पंचायत चुनाव को लेकर अनाप-शनाप बयानबाजी की जा रही है।
प्रशासक की तैनाती से बढ़ेगी परेशानी
पूर्व प्रधान टीकरमाफी संजय सिंह ने बताया कि कोरोना काल में भी पंचायत चुनाव छह माह के लिए टला था। उस वक्त भी प्रशासक तैनात किए गए थे। प्रशासक की तैनाती से विकास कार्य प्रभावित हुए थे और ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी थी। इस बार भी प्रशासक तैनात होते हैं तो व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहेगी।