अमेठी सिटी। नए शैक्षिक सत्र के साथ स्कूलों में चहल-पहल बढ़ी है। 1200 से अधिक निजी स्कूलों में करीब 40 हजार बच्चे बस, वैन या अन्य सवारी वाहनों से पढ़ने जा रहे हैं। सड़कों पर बड़ी संख्या में ऐसे वाहन दौड़ रहे हैं, जिनकी फिटनेस खत्म हो चुकी है। परिवहन विभाग के आंकड़ें बता रहे हैं कि 195 स्कूली वाहन बिना फिटनेस दौड़ रहे हैं।
जिले में 382 स्कूल बस और 443 वैन पंजीकृत हैं। इनमें 56 बस और 139 वैन की फिटनेस समाप्त हो चुकी है। इनमें से 89 वाहनों का पंजीकरण निरस्त हो चुका है, जबकि 106 चालकों को नोटिस जारी हुए हैं। इसके बावजूद ये वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में बस के इतर ई रिक्शा, वैन और निजी साधनों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। कई वाहन बिना वैध दस्तावेज के चल रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में यह समस्या और गंभीर है। स्कूलों के बाहर ओवरलोड ई रिक्शा और ऑटो बच्चों से खचाखच भरे नजर आते हैं। सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम बात हो चुकी है।
मुसाफिरखाना में पलटी थी तेज रफ्तार स्कूली वैन
मुसाफिरखाना के पूरे चौहान भनौली गांव के पास 30 अप्रैल 2025 की सुबह स्कूली बच्चों को ले जा रही वैन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई थी। हादसे में दो बच्चे घायल हो गए थे। ग्रामीणों ने बच्चों को वैन से निकालकर सीएचसी पहुंचाया था। सोशल मीडिया पर हादसे से जुड़ा वीडियो भी वायरल हुआ था। एक बच्चे के अभिभावक ने आरोप लगाया था कि वैन में करीब 20 बच्चे सवार थे। ड्राइवर नशे में था और लापरवाही से वाहन चला रहा था, जिससे हादसा हुआ। इस मामले में वैन ड्राइवर पर एफआईआर दर्ज की गई थी।
नहीं देखा तो अब वक्त है आंखें खोलने का
सुबह का वही प्यारा दृश्य…कोई मां जल्दी-जल्दी टिफिन तैयार कर रही है, कोई पिता जूते का फीता कस रहा है। नन्हा बच्चा नई ड्रेस में मुस्कुराता हुआ स्कूल जाने को तैयार खड़ा है। कंधे पर झूलता कॉर्टून वाला बैग, हाथ में रंगीन बोतल… सब कुछ परफेक्ट। लेकिन जैसे ही वह स्कूल वाहन में बैठता है, यह परफेक्ट तस्वीर अचानक जोखिम में बदल जाती है। क्या आपने कभी झांककर देखा है उस वाहन के भीतर, जिसमें आपका बच्चा रोज सफर करता है। कहीं ओवरलोडिंग तो नहीं, कहीं सीटों की हालत खराब तो नहीं, कहीं चालक लापरवाह तो नहीं। अगर नहीं देखा तो अब वक्त है आंखें खोलने का।
सवाल तो वाजिब है
-क्या आप स्कूल से बस की फिटनेस रिपोर्ट नहीं मांग सकते?
-कॉपी-किताबें स्कूलों से ही तो बस या वैन बाहरी क्यों?
-स्कूल व बाहरी वैन की दर में इतना अंतर क्यों?
-क्या इनमें स्कूलों के कमीशन का खेल है?
-आखिर बसों की किराया कौन तय करता है?
-बच्चों को ई रिक्शे से क्यों स्कूल भेजते हैं?
-एलपीजी से चलने वाली वैन में बच्चों को क्यों बैठाते हैं?
लगातार हो रही कार्रवाई
एआरटीओ महेंद्र बाबू का कहना है कि अनफिट वाहनों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। संयुक्त टीम गठित कर जांच करने संग स्कूलों को भी पत्र भेजा गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों का तुरंत चालान किया जा रहा है। खासकर स्कूली वाहनों को चेक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।