मुसाफिरखाना। पूरे मोहम्मद नेवाज गांव में बुधवार को शिवपता की हत्या अचानक नहीं हुई। पारिवारिक जमीन विवाद की लंबी पृष्ठभूमि इस घटना से जुड़ी है। वरासत में नाम दर्ज कराने से शुरू हुआ विवाद समय के साथ गहराता गया और अंत में हिंसा में बदल गया, जिसमें शिवपता की जान चली गई।
मृतका की बहू सुनीता ने बताया कि शिवपता के पिता दयाराम की मृत्यु उस समय हो गई थी, जब वह मात्र पांच वर्ष की थीं। दयाराम के निधन के बाद चकबंदी के समय उनकी जमीन की वरासत केवल उनके दो भाइयों रामदयाल और रामबख्श के नाम दर्ज हो गई थी। परिवार ने उस समय शिवपता को भरोसा दिलाया था कि चाचा रामबख्श की कोई संतान नहीं है, इसलिए वह उनके साथ रहें। कहा गया था कि भविष्य में पूरी जमीन शिवपता के नाम हो जाएगी। दयाराम, रामदयाल और रामबख्श आपस में सगे भाई थे।
बाद में रामबख्श की मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी जमीन की वरासत उनकी पत्नी अवतारा के नाम दर्ज हो गई। सुनीता का कहना है कि कोरोना काल में अवतारा के बीमार होने पर रामदयाल के पुत्र गोवर्धन ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान अवतारा की मौत हो गई। इसके बाद अवतारा के नाम दर्ज जमीन गोवर्धन के नाम चढ़ा दी गई। इसी बात से विवाद और बढ़ गया। सुनीता ने आरोप लगाया कि जमीन से जुड़ा यही पुराना झगड़ा मारपीट में बदल गया, जिसमें शिवपता की जान चली गई।
इंस्पेक्टर विवेक सिंह ने बताया कि हत्या के आरोपी प्रधान पति तौकीर, जयवर्धन, हर्षवर्धन, जहीद उल्ला और बल्लन की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।