अमेठी सिटी। सीतापुर की मूल निवासी नूतन मिश्रा वर्ष 2015 में बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़ीं। वर्ष 2021 में स्थानांतरण के बाद उनकी नियुक्ति सिंहपुर विकासखंड के कंपोजिट विद्यालय पन्हौना में हुई। ग्रामीण परिवेश के इस विद्यालय में अधिकतर बच्चों की आर्थिक स्थिति कमजोर रही है। ऐसे हालात देख सहायक अध्यापिका नूतन ने निश्चय किया कि विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकों तक सीमित न रखकर उन्हें हुनरमंद भी बनाया जाए। उनका मानना है कि बदलते दौर में किताबी ज्ञान के साथ तकनीकी व व्यावहारिक शिक्षा आवश्यक है, जिससे आगे चलकर बच्चों को रोजगार के अवसर सहज मिल सकें।
कंपोजिट विद्यालय पन्हौना में इस समय 238 बच्चे नामांकित हैं। यहां सात सहायक अध्यापक और दो शिक्षामित्र कार्यरत हैं। नूतन ने विद्यालय के वातावरण को कौशल विकास की दिशा में मोड़ा। परिसर में लगे एलोवेरा और हल्दी का उपयोग कर बच्चे साबुन और हैंडवॉश तैयार कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि यह सब शून्य निवेश की पद्धति से संभव हो रहा है। तैयार उत्पाद का प्रयोग विद्यालय में तो होता ही है, बच्चे उसे अपने घर पर भी इस्तेमाल करते हैं। इसी तरह वे टमाटर सॉस, जैम और अचार भी स्वयं बनाते हैं, जिसे मिड-डे मील में शामिल किया जाता है।
विद्यालय की छात्राओं को सिलाई व कढ़ाई सिखाई जा रही है। वे रुमाल पर आकर्षक डिजाइन तैयार करने के साथ फ्रॉक और पजामा जैसी पोशाकें भी सिल रही हैं। इतना ही नहीं, मोजे व स्वेटर बुनने में भी वे दक्ष होती जा रही हैं। इन गतिविधियों ने छात्राओं के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। विद्यालय में हुए बदलाव का असर नामांकन और उपस्थिति पर दिख रहा है। कुछ वर्ष पूर्व बच्चों की संख्या 200 से कम थी, वहीं अब यह 238 तक पहुंच चुकी है।
अभिभावक भी बच्चों की रुचि देखकर उन्हें नियमित रूप से विद्यालय भेज रहे हैं। नूतन मिश्रा का यह प्रयास साबित करता है कि शिक्षा केवल किताबों का ज्ञान नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल सिखाने का माध्यम भी है। उनकी मेहनत और सोच ने बच्चों के भविष्य को नई दिशा दी है। उनका कार्य जिले की अन्य शिक्षिकाओं के लिए प्रेरणा का सशक्त उदाहरण है।