कमरौली (अमेठी)। प्रभु हमें समझाना चाहते हैं कि सृष्टि का सार तत्व परमात्मा है। इसलिए संसार के नश्वर भोग पदार्थों की प्राप्ति में अपना समय, साधन और सामर्थ्य को अपव्यय करने की जगह हमें अपने अंदर स्थित परमात्मा को प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसी से जीवन का कल्याण संभव है। ये बातें कमरौली के उतेलवा में सनातन बंधु मंडल की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार को प्रवाचक हरेंद्रदास महाराज ने श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि संसार की कोई भी वस्तु भगवान से अलग नहीं है। परमात्मा ही परम सत्य है। जब हमारी वृत्ति परमात्मा में लगेगी तो संसार का बंधन छूट जाएगा। प्रश्न यह है कि परमात्मा संसार में घुले-मिले हैं तो संसार का नाश होने पर भी परमात्मा का नाश क्यों नहीं होता। इसका उत्तर यही है कि भगवान संसार से जुड़े भी हैं और अलग भी हैं। आकाश में बादल रहता है और बादल के अंदर भी आकाश तत्व है। बादल के गायब होने पर भी आकाश गायब नहीं होता। इसी तरह संसार गायब होने पर भी परमात्मा गायब नहीं होते।
प्रवाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के घरों से माखन चोरी की। इस घटना के पीछे भी आध्यात्मिक रहस्य है। दूध का सार तत्व माखन है। प्रवाचक ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा से जीवन को कैसे जिया जाए, यह सीख मनुष्य को मिली है। इसलिए जब भी अवसर मिले, कथा का श्रवण जरूर करें। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।