अमेठी सिटी। मेधावी युवाओं ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों, ग्रामीण पृष्ठभूमि और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद इन अभ्यर्थियों ने अपने लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण और निरंतर मेहनत के बल पर प्रशासनिक सेवाओं में स्थान बनाया है। किसान का बेटा डिप्टी जेलर बनेगा, वहीं जीव विज्ञान की प्रवक्ता को नायब तहसीलदार की जिम्मेदारी मिलने जा रही है। कई अभ्यर्थियों ने बार-बार असफलता मिलने के बावजूद हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते हुए सफलता हासिल की। इन युवाओं की सफलता के पीछे परिवार का सहयोग, शिक्षकों का मार्गदर्शन और स्वयं का अनुशासन प्रमुख रहा।
तीसरे प्रयास में रजनीश विक्रम सिंह बने डिप्टी जेलर
गौरीगंज। क्षेत्र के इटौजा गांव निवासी रजनीश विक्रम सिंह डिप्टी जेलर बनने जा रहे हैं। रजनीश के पिता भगवानबक्श सिंह खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। रजनीश की प्रारंभिक शिक्षा शिव महेश इंग्लिश मीडियम स्कूल गौरीगंज में हुई। उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट शिव प्रताप इंटर कॉलेज अमेठी से किया। इंटरमीडिएट में वर्ष 2007 में उन्होंने टॉप किया था। इसके बाद बीबीडी लखनऊ से बीटेक की डिग्री हासिल की। तीसरे प्रयास में उन्हें सफलता मिली है। (संवाद)
विज्ञान की प्रवक्ता स्नेहा बनीं नायब तहसीलदार
अमेठी। कुड़वा डालव गांव की स्नेहा ने चौथे प्रयास में 92वीं रैंक हासिल की है। अब वह नायब तहसीलदार बनेंगी। स्नेहा वर्तमान में सुल्तानपुर के हनुमत इंटर कॉलेज में जीव विज्ञान की प्रवक्ता हैं। उनके पिता हरियाणा में राजकीय इंटर कॉलेज के प्राचार्य हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। चार बहनों में सबसे बड़ी स्नेहा की शादी नवंबर 2025 में गौरीगंज के पंडरी गांव निवासी सहायक अध्यापक विपुल पांडेय से हुई। स्नेहा ने आरआरपीजी कॉलेज अमेठी से स्नातक और केएनआई कॉलेज सुल्तानपुर से परास्नातक किया है। उन्होंने बताया कि घर में रहकर ऑनलाइन माध्यम से तैयारी की। (संवाद)
घर में तैयारी कर अर्पित बने असिस्टेंट कमिश्नर
जगदीशपुर। पालपुर निवासी अर्पित सिंह ने 73वीं रैंक हासिल कर असिस्टेंट कमिश्नर पद प्राप्त किया है। वह पूर्व प्रधान एवं बीएचईएल से सेवानिवृत्त राकेश सिंह के पुत्र हैं। अर्पित ने प्रारंभिक शिक्षा गांव से प्राप्त करने के बाद क्राइस्ट द किंग इंटर कॉलेज से हाईस्कूल और केंद्रीय विद्यालय जगदीशपुर से इंटरमीडिएट किया। उन्होंने कोचिंग पर निर्भर रहने के बजाय घर में रहकर तैयारी की। अर्पित ने अपनी सफलता का श्रेय पिता के मार्गदर्शन, शिक्षकों के सहयोग और निरंतर मेहनत को दिया। (संवाद)
पहले प्रयास में मानसी बनीं डिप्टी जेलर
जगदीशपुर। कस्बा निवासी मानसी सिंह पहले ही प्रयास में परीक्षा उत्तीर्ण कर डिप्टी जेलर बनेंगी। यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह एएच इंटर कॉलेज जगदीशपुर की पहली छात्रा हैं। मानसी ने हाईस्कूल की पढ़ाई एएच इंटर कॉलेज और इंटरमीडिएट मुसाफिरखाना से किया। इसके बाद राम स्वरूप इंजीनियरिंग कॉलेज लखनऊ से बीटेक किया। उन्होंने दिल्ली के मुखर्जीनगर में कोचिंग लेने के साथ ऑनलाइन माध्यम और लाइब्रेरी में नियमित अध्ययन किया। उनके पिता मानसिंह इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य हैं और माता मनोरमा सिंह शिक्षण संस्थान की प्रबंधक हैं। मानसी आगे यूपीएससी की तैयारी भी जारी रखेंगी। (संवाद)
सिपाही से असिस्टेंट कमिश्नर बने आशीष
बाजारशुकुल। पूरे शुक्लन गांव निवासी आशीष शुक्ल परीक्षा उत्तीर्ण कर असिस्टेंट कमिश्नर (जीएसटी) बनने जा रहे हैं। आशीष वर्ष 2018 बैच में उत्तर प्रदेश पुलिस में आरक्षी के पद पर चयनित हुए थे। वर्तमान में नौकरी के साथ तैयारी करते हुए उन्होंने सफलता हासिल की। उनकी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय पूरे शुक्लन में हुई, जबकि आगे की पढ़ाई नवोदय विद्यालय गौरीगंज से पूरी की। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी से स्नातक किया। (संवाद)
दूसरे प्रयास में साक्षी पांडेय की आई 30वीं रैंक
शाहगढ़। उसरापुर गांव की साक्षी पांडेय ने यूपीपीएससी परीक्षा में 30वीं रैंक हासिल कर असिस्टेंट कमिश्नर पद प्राप्त किया है। उनके पिता राम बहादुर पांडेय कानपुर में सेल टैक्स विभाग में अमीन हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। साक्षी ने प्रारंभिक शिक्षा अर्चना बाल विद्या मंदिर, शाहगढ़ से तथा हाईस्कूल और इंटरमीडिएट सरस्वती विद्या मंदिर कानपुर से पूरा किया। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक किया और वहीं रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। पहले प्रयास में असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की। (संवाद)
अनुराधा बनीं असिस्टेंट कॉमर्शियल टैक्स अधिकारी
संग्रामपुर। नेवादा कनू गांव की अनुराधा सिंह ने 158वीं रैंक प्राप्त कर असिस्टेंट कॉमर्शियल टैक्स अधिकारी पद हासिल किया है। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा मथुरा से और उच्च शिक्षा जामिया विश्वविद्यालय दिल्ली से प्राप्त की। वर्ष 2020 में उनकी शादी आकाश सिंह से हुई जो इंजीनियर हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने घर पर रहकर तैयारी जारी रखी और सफलता हासिल की। कुछ महीने पहले ही वह मां बनी हैं। (संवाद)
रोशनी पटेल बनीं असिस्टेंट कमिश्नर
जायस। मवई आलमपुर निवासी रोशनी पटेल ने असिस्टेंट कमिश्नर पद हासिल किया है। वह रायबरेली के व्यवसायी सुरेश चंद्र पटेल की पुत्री हैं। रोशनी ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के दम पर यह उपलब्धि हासिल की है। वह पहले यूपीएससी साक्षात्कार तक भी पहुंची हैं जो उनके मजबूत इरादों को दर्शाता है। उनकी सफलता से पूरे जनपद में खुशी और उत्साह का माहौल है। (संवाद)
सहायक अध्यापिका प्रीती बनीं अफसर
अमेठी। कंपोजिट विद्यालय अमेठी में कार्यरत सहायक अध्यापिका प्रीती मिश्र ने असिस्टेंट कॉमर्शियल टैक्स ऑफिसर पद प्राप्त किया है। वह पूरे चौबे मजरे कोहरा की निवासी हैं। प्रीती की प्रारंभिक शिक्षा जंगबहादुर इंटर कॉलेज से हुई, जबकि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट श्री शिव प्रताप इंटर कॉलेज से उत्तीर्ण किया। उन्होंने आरआरपीजी कॉलेज अमेठी से बीएससी और एमए की पढ़ाई पूरी की। यह उनका चौथा मेंस और दूसरा इंटरव्यू था। उन्होंने बिहार पीसीएस का इंटरव्यू भी दिया है। प्रीती ने सफलता का श्रेय परिवार, गुरुजनों और साथियों को दिया।(संवाद)
टॉप-10 में आयुष पांडेय, संघर्ष से पाई सफलता
संग्रामपुर। पांडेय का पुरवा डेहरा निवासी आयुष पांडेय ने यूपीपीएससी परीक्षा में टॉप-10 में स्थान हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है। उनके पिता स्व. सीएल पांडेय खंड विकास अधिकारी थे, जिनकी दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी माता डॉ. वंदना पांडेय ने अध्यापक रहते हुए परिवार को संभाला। कठिन परिस्थितियों के बावजूद आयुष ने पढ़ाई जारी रखी और सफलता हासिल की। उनके बड़े भाई रेलवे में अधिकारी हैं।
पहले प्रयास में सुधांशु बने ट्रेजरी अफसर
मुसाफिरखाना। दिल्ली में रहकर तैयारी करने वाले कस्बा निवासी सुधांशु ने पहले ही प्रयास में 9वीं रैंक प्राप्त की है। अब वह ट्रेजरी अफसर बनेंगे। सुधांशु के पिता ओम प्रकाश गुप्ता पीसीएस अधिकारी रहे हैं। घर का माहौल शुरू से ही प्रशासनिक सेवा की ओर प्रेरित करता रहा। माता मुन्नी देवी ने हर कदम पर सहयोग किया। परिवार में दो बड़ी बहनें प्रीति गुप्ता और नेहा गुप्ता हैं। सुधांशु ने सफलता का श्रेय माता-पिता और परिवार के सहयोग को दिया। उनका कहना है कि लगातार मेहनत, सही दिशा और अनुशासन से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताई।