अमेठी सिटी। दो दिन से लगातार धूप निकलने से मिली राहत रविवार को समाप्त हो गई। सुबह की शुरुआत कोहरे के साथ हुई, लेकिन देखते ही देखते बादल छा गए। बूंदाबांदी शुरू हुई जो पूरे दिन रुक-रुक कर जारी रही। बूंदाबांदी से गलन बढ़ गई। इससे लोग परेशान रहे। दिनभर बादलों के बीच धुंध छाई रही। अगले दो-तीन दिन में तापमान और लुढ़कने का अनुमान है।
जनवरी में मौसम में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। रविवार की सुबह बूंदाबांदी हुई। दिन में अधिकांश समय बादल छाए रहे। बादलों संग छाई धुंध के चलते सड़कों पर दिन में भी लोग लाइट जलाकर वाहन चलाते नजर आए। मौसम की करवट का नतीजा यह रहा कि लोग दिनभर घरों में दुबके रहे। ठंड से राहत पाने के लिए अलाव ही लोगों का सहारा बना हुआ है।
सुबह बूंदाबांदी होने के साथ कुछ देर के लिए हल्की बारिश से दिन में गलन बढ़ गई। रुक-रुक कर हो रही बूंदाबांदी से धुंध का भी असर रहा। दोपहिया वाहनों पर लोग खुद को गर्म कपड़ों से ढककर गुजरते दिखे, जबकि चौक-चौराहों पर जगह-जगह लोग अलाव तापते नजर आए। बूंदाबांदी के चलते खुले में लोगों की चहलकदमी कम हो गई। बुजुर्ग और बच्चे ज्यादातर समय घरों के अंदर दुबके रहे। बाहर निकले तो ठंड से बचाव करते हुए नजर आए। अगले दो-तीन दिन में ठंड बढ़ने के आसार हैं तो पारा भी लुढ़कने की संभावना है। ऐसे में ठंड से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि रविवार को अधिकतम तापमान 28 डिग्री रहा जो सामान्य से सात डिग्री अधिक रहा। न्यूनतम तापमान 7.0 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम में सापेक्षिक आर्द्रता अधिकतम 88 व न्यूनतम 59 प्रतिशत रही। 3.4 किलोमीटर रफ्तार से उत्तरी-पश्चिमी हवाएं चलीं। बताया कि आगामी 24 घंटे मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है। औसत तापमान सामान्य के आसपास रहने एवं पश्चिमी हवा के सामान्य गति से चलने की संभावना है। अगले दो-तीन दिन में तापमान और लुढ़कने का अनुमान है।
कड़ाके की सर्दी में सेहत का रखें ख्याल
गौरीगंज सीएचसी प्रभारी डॉ. राजीव सौरभ ने बताया कि गलन बच्चों और बुजुर्गों को बीमार कर रही है। इनकी सेहत को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी होगी। धूप भी नहीं निकल रही तो शीत हवाओं संग मौसम में नमी होने के बाद भी लोग ठंड से बचाव में लापरवाही बरत रहे हैं। इस मौसम में वायरल इंफेक्शन का खतरा अधिक हो जाता है। जो बच्चे अस्पताल आ रहे हैं, उनमें बुखार, सर्दी, खांसी और जुकाम आदि बीमारियों की शिकायत देखी जा रही है। इसमें सर्दी से बीमार हुए बच्चों की संख्या अधिक है। कड़ाके की सर्दी मेें सेहत का विशेष ध्यान रखने का जरूरत है।
ऐसे करें बचाव
- पानी में बच्चों को न खेलने दें और ठंडी चीजें खाने को न दें।
- बच्चों को दूध व पानी गुनगुना करके दें।
- बुजुर्ग सुबह जल्दी बाहर टहलने न निकलें।
- हल्की धूप के बाद भी ऊनी कपड़े पहनकर निकलें।
- हृदय और उच्च रक्तचाप वाले मरीज विशेष सतर्क रहें।
- सांस लेने में परेशानी पर डॉक्टर की सलाह लें।
ठंड बढ़ने से किसान खुश
जिले में करीब 1.13 लाख हेक्टेयर में गेहूं और करीब 30 लाख हेक्टेयर में सरसों की फसल है। इस मौसम में बारिश और बूंदाबांदी गेहूं और सरसों दोनों फसलों के लिए फायदेमंद है। इस समय किसान गेहूं में पहली सिंचाई की तैयारी में हैं। इस दौरान बूंदाबांदी से गेहूं में बालियां फूटने के साथ पौधों में वृद्धि होगी। वहीं बारिश से सरसों की फसल बीमारी से मुक्त होगी। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अभी गेहूं की सिंचाई न करने की सलाह दी है। ठंड बढ़ने से किसानों के चेहरे पर खुशी नजर आ रही है। फसलों की अच्छी पैदावार के लालच में किसान ठंड सहन करने को भी तैयार हैं। किसानों की मानें तो गेहूं की फसल के लिए शीतलहर वाली ठंड बेहद जरूरी होती हैं। यदि कायदे से ठंड नहीं पड़ेगी तो गेहूं के पौधों का पोषण नहीं हो पाएगा। इससे पैदावार प्रभावित होगी। हालांकि मौसम परिवर्तन सिर्फ गेहूं फसल के लिए लाभदायक है। मटर, आलू संग सब्जी फसलों पर पाला का प्रकोप होने की संभावना को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक बचाव की जानकारी दे रहे हैं।