जन्माष्टमी के लिए खरीदारी करतीं युवतियां।
- फोटो : जन्माष्टमी के लिए खरीदारी करतीं युवतियां।
अमेठी सिटी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी नजदीक आते ही जिले के बाजार उत्सव की रंगत से सराबोर हो गए हैं। गौरीगंज, अमेठी, जायस और जगदीशपुर के मुख्य बाजारों से लेकर सड़क किनारे सजे अस्थायी स्टॉल तक, हर जगह कान्हा के लिए आकर्षक सजावटी सामान की भरमार है। पीतल के लड्डू गोपाल, मोती जड़ी मुरली, कुंदन और जरी के पालने, मोर मुकुट, सिंहासन और रंग-बिरंगी पोशाकें खरीदारों को खूब भा रही हैं।
स्टॉल पर पारंपरिक लकड़ी के झूलों के साथ डिजाइनदार सोफादार झूले भी सज गए हैं, जिन्हें रंगीन मोतियों और क्रिस्टल से सजाया गया है। छोटी चारपाई, सोफा-बेड, सिंहासन और खटिया जैसे सजावटी फर्नीचर भी नंदलाल के शृंगार में चार चांद लगा रहे हैं। बिजली से चलने वाले झूले भी आए हैं, पर ग्राहकों का रुझान अब भी लकड़ी के झूलों की ओर अधिक है। कान्हा की पोशाकों में हरे, पीले और गुलाबी रंग की ड्रेस विशेष रूप से पसंद की जा रही है। विक्रेताओं ने मथुरा, वृंदावन और कोलकाता से आई नई डिजाइन की पोशाकें मंगाई हैं। इनके साथ स्पेशल पगड़ी, मोर मुकुट और रंग-बिरंगी बांसुरियां भी ग्राहकों को लुभा रही हैं। महंगाई के बावजूद लोग गुणवत्तापूर्ण शृंगार सामग्री चुन रहे हैं। गौरीगंज बाजार में सजी लड्डू गोपाल की मोहक मूर्तियां राहगीरों को ठहरने पर मजबूर कर रही हैं। दुकानदार धर्मेंद्र चौरसिया का कहना है कि इस बार भीड़ पिछले वर्ष से अधिक है और ग्राहक सजावट में नएपन की तलाश में हैं। झूलों से लेकर शृंगार किट तक, हर सामान की मांग बनी हुई है।
सामग्रियों की कीमत (रुपये में)
मेटल झूला–150 से 300
लकड़ी का झूला–180 से 800
लड्डू गोपाल–100 से 2,000
पगड़ी– 30 से 450
मुकुट– 30 से 1,500
मोर मुकुट–30 से 120
खटिया– 150 से 300
सोफा-सिंहासन–100 से 550
बांसुरी – 20 से 70
शृंगार किट – 50 से 200
पंखा/कूलर – 50 से 250
कपड़ा (लड्डू गोपाल)– 30 से 700