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प्रशिक्षण के दौरान पहले भी हो चुकीं ऐसी घटनाएं

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फुरसतगंज (अमेठी)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी के प्रशिक्षु विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इसके पहले भी यहां के प्रशिक्षु विमान हादसों का शिकार हो चुके हैं। गत डेढ़ दशक में हुई दो अलग-अलग घटनाओं में जहां दो प्रशिक्षु पायलट की मौत हो गई तो दो बार सिर्फ विमान ही नष्ट हुए।
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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (इग्रुआ) की स्थापना तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1985 में की थी। यह रायबरेली-सुल्तानपुर राजमार्ग पर फुरसतगंज में स्थित है। इग्रुआ के प्रशिक्षु विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाओं पर नजर दौड़ाएं तो पिछले डेढ़ दशक में कई हादसे हुए हैं। इस तरह की पहली दुर्घटना करीब डेढ़ दशक पहले रायबरेली जिले के भूएमऊ के निकट हुई थी।
इस दुर्घटना प्रशिक्षु विमान हाईटेंशन बिजली के तारों में उलझ गया था, जिसका काफी हिस्सा जलकर नष्ट हो गया था। बाकी हिस्सा काफी दूर बाद टूटकर गिरा था। हालांकि इस दौरान प्रशिक्षु पायलट ने विमान से छलांग लगाकर अपनी जान बचा ली थी। इसी तरह करीब एक दशक पहले ऐसा ही एक हादसा एक महाराष्ट्र के गोंदिया (इग्रुआ की शाखा) में भी हुआ था।
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तब प्रशिक्षु पायलट सोहेल अंसारी सोलो क्रॉस कंट्री उड़ान पर निकला था। विमान पहाड़ियों से टकरा गया था। हादसे में प्रशिक्षु पायलट की मौत हो गई थी। तीसरी बड़ी घटना 21 सितंबर 2020 को आजमगढ़ में हुई थी। इस दुर्घटना में इग्रुआ का एक विमान आजमगढ़ में क्रैश होने से प्रशिक्षु पायलट कोणार्क शरन की मौत हो गई थी। कोणार्क शरन तीन बहनों में इकलौता भाई था। उसके पिता एयर इंडिया में कार्यरत थे।
रनवे पर भी हुए हादसे
21 अक्टूबर 2019 को इग्रुवा के रनवे पर एक महिला प्रशिक्षु पायलट प्रशिक्षण ले रही थी। रनवे पर उतरते समय पहिया न खुलने की वजह से प्रशिक्षु विमान काफी दूर तक रगड़ता चला गया था। इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ था। इसी तरह जून 2021 में रनवे पर उतरते समय एक प्रशिक्षु विमान उछल कर नाले में चला गया था। इसमें आग लग गई थी। इस हादसे में प्रशिक्षु पायलट ने कूदकर जान बचाई थी।
कभी-कभी हो जाते हैं हादसे
इग्रुआ के मीडिया प्रभारी रामकिशोर द्विवेदी ने कहा कि प्रशिक्षण के लिए जो भी विमान उपयोग में लाए जाते हैं, उनका परीक्षण डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) से कराया जाता है। इसके बाद प्रशिक्षु विमान में उड़ान भरते हैं। बावजूद कभी-कभी ऐसे हादसे हो जाते हैं।
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