अमेठी। विश्व गौरैया दिवस पर गौरैया के संरक्षण को लेकर रस्म अदायगी सरकारी तंत्र की तरफ से की गई, लेकिन जिले के सामाजिक संगठन दूर-दूर तक इसके लिए नजर नहीं आए। वन विभाग ने लोगों को गौरैया संरक्षण का तरीका बताया और इसे अमल में लाने की अपील की। बृहस्पतिवार को वन क्षेत्राधिकारी कार्यालय में गौरैया की घटती आबादी पर चिंता जताते हुए उनके संरक्षण के उपायों पर संगोष्ठी आयोजित की गई।
यूं तो सामान्य मामलों तक में सामाजिक संगठनों की भागीदारी आम है, लेकिन गौरैया संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को लेकर इनमें जागरूकता नहीं दिखी। हाल ऐसा रहा कि जिले में गौरैया संरक्षण को लेकर एक भी आयोजन सामाजिक संगठनों की तरफ से नहीं किया गया। हां कुछ पर्यावरण प्रेमी जरूर हैं जो खुद के स्तर पर इस प्रयास में लगे हैं, लेकिन उन्हें दिखावा करने से परहेज है। दूसरी तरफ सरकारी तंत्र गौरैया की घटती संख्या को लेकर फिक्रमंद है।
वन क्षेत्राधिकारी अमेठी मोहम्मद इब्राहिम ने कहा कि गौरैया पर्यावरण के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हाल के वर्षों में इसकी घटती संख्या चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि समय रहते यदि इनके संरक्षण के प्रयास नहीं किए गए तो पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
वन दरोगा रणवीर सिंह ने बताया कि पिछले दो दशक में गौरैया की आबादी में तेजी से गिरावट आई है। उन्होंने सुझाव दिया कि लोग अपने घरों में छोटे-छोटे घोंसले बनाकर और दाना-पानी की व्यवस्था कर गौरैया को संरक्षित कर सकते हैं। इस मौके पर वन विभाग के अधिकारियों ने अपील की कि वे अपने घरों में घोंसले लगाने, पानी के पात्र रखने और रासायनिक पदार्थों के प्रयोग में कमी लाकर गौरैया संरक्षण में योगदान दें। इस मौके पर रामराज, शिव कुमार, अंगद सिंह आदि मौजूद रहे।