जामों के जोरावरपुर गांव में कथा सुनते श्रद्धालु। स्त्रोत : आयोजक
जामों। भागवत कथा मनुष्य को सत्य मार्ग पर चलकर धर्म व समाज उत्थान की रक्षा करने की शिक्षा प्रदान करती है। भगवान श्रीकृष्ण की लीला और उपदेश आत्मा को सुख देने के साथ जीवन के दुखों और विषमताओं को दूर करने में मदद करते है। भागवत कथा सुनने से मनुष्य को संतुष्टि मिलती है। ये बातें प्रतापगढ़ से आए प्रवाचक आचार्य डाॅ. शिवेश महाराज ने जोरावरपुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार को कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि माखन चोरी प्रसंग भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला का हिस्सा है, जिसमें वह अपनी सखियों के साथ मिलकर दही और माखन चुराते थे और फिर उसे आपस में बांटकर खाते थे। यह लीला उनकी शरारत, प्रेम और निर्मल हृदय को दर्शाती है। कहा कि माखन शुद्ध भक्ति और निष्छल प्रेम का प्रतीक है।
प्रवाचक ने कहा कि यह कथा मनुष्य जीवन सुखमय बनाने के साथ भक्ति और ज्ञान प्रदान करती है। यह हमें सत्य मार्ग पर चलकर गरीब परिवार की भलाई करने की सलाह देती है। भगवान की महिमा और उनकी ओर से दिए गए उपदेश मनुष्य की आत्मा को शांति प्रदान करते हैं। मुख्य यजमान रामनाथ मिश्र और उनकी पत्नी शकुंतला मिश्रा ने व्यास पीठ की आरती उतारी। इस अवसर पर कृपाशंकर मिश्र, अखिलेश कुमार तिवारी, जगत नारायण मिश्र, छोटेलाल तिवारी आदि मौजूद रहे।